25 Dec 2025
नई दिल्ली, 25 दिसंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के संपूर्ण कार्यों की अंतिम श्रृंखला "महामना वांग्मय" का विमोचन किया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने महामना मालवीय को एक महान राष्ट्रवादी, पत्रकार, समाज सुधारक, वकील, राजनेता, शिक्षाविद् और प्राचीन भारतीय संस्कृति के एक प्रतिष्ठित विद्वान के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि पंडित मालवीय एक दुर्लभ दूरदर्शी थे, जिनका दृढ़ विश्वास था कि भारत का भविष्य अपने अतीत को त्यागने में नहीं, बल्कि उसे पुनर्जीवित करने में है। इस प्रकार उन्होंने भारत के प्राचीन मूल्यों और आधुनिक लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के बीच एक सेतु का काम किया।
पंडित मालवीय की वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह प्राचीन और आधुनिक सभ्यताओं के सर्वोत्तम तत्वों को सामंजस्य बिठाने की उनकी क्षमता को दर्शाता है।
औपनिवेशिक शासन के दौरान राष्ट्रीय जागरण के सबसे मजबूत साधन के रूप में शिक्षा में महामना मालवीय के विश्वास को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति को एक साथ विकसित होना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत, आत्मनिर्भर और प्रबुद्ध भारत के महामना मालवीय के दृष्टिकोण की गूंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समर्थित आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और 2047 तक विकसित भारत के मिशन जैसी समकालीन पहलों में गहराई से सुनाई देती है, जो पंडित मालवीय की स्थायी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि महामना मालवीय का समावेशी, मूल्य-आधारित और कौशल-उन्मुख शिक्षा पर ज़ोर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में साफ तौर पर दिखता है।
महामना वांग्मय को सिर्फ़ लेखों का संग्रह न बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बौद्धिक डीएनए और देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक ब्लूप्रिंट है। उन्होंने महामना मालवीय मिशन और प्रकाशन विभाग को उनके इस बड़े प्रयास के लिए बधाई दी और विश्वविद्यालयों, विद्वानों और युवा शोधकर्ताओं से इन खंडों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने का आग्रह किया, यह देखते हुए कि ये समकालीन चुनौतियों का स्थायी समाधान प्रदान करते हैं।
महामना वांग्मय की दूसरी और अंतिम श्रृंखला, जिसमें लगभग 3,500 पृष्ठों में फैले 12 खंड शामिल हैं, पंडित मदन मोहन मालवीय के लेखों और भाषणों का एक व्यापक संग्रह है। इस कार्यक्रम का आयोजन महामना मालवीय मिशन द्वारा किया गया था, जबकि पुस्तकों का प्रकाशन सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा किया गया है। एकत्रित कार्यों की पहली श्रृंखला 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी की गई थी।