10 Apr 2026
हैदराबाद, 10 अप्रैल (हि.स.)। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी पर की गई टिप्पणी के मामले में कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा को एक सप्ताह की अग्रिम जमानत दे दी है। असम पुलिस में दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी से बचने के लिए खेड़ा ने राहत की मांग की थी।तेलंगाना उच्च न्यायालय के जस्टिस के. सुजाना की पीठ ने खेड़ा को सात दिनों का संरक्षण दिया है। यह ट्रांजिट बेल इसलिए दी गई है, ताकि खेड़ा असम जाकर वहां की संबंधित अदालत में नियमित अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकें। यह एफआईआर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर दर्ज की गई थी। यह कानूनी विवाद 5 अप्रैल को पवन खेड़ा की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री के परिवार पर कई आरोप लगाए थे। खेड़ा ने दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और दुबई व अमेरिका में अघोषित संपत्ति है। इसके बाद असम पुलिस ने मानहानि, जालसाजी, धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। एफआईआर दर्ज होने के बाद 7 अप्रैल को असम पुलिस की एक टीम नई दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास पर भी गई थी, लेकिन वे वहां मौजूद नहीं थे। सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का है और एक प्रेस बयान के लिए लगाई गई धाराएं अत्यधिक हैं। असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने इस याचिका की विचारणीयता पर सवाल उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि मामला असम में दर्ज है और खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं, इसलिए तेलंगाना उच्च न्यायालय के पास इसका अधिकार क्षेत्र नहीं है। हालांकि, अदालत ने कानूनी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए खेड़ा को अस्थायी ट्रांजिट राहत प्रदान करने का निर्णय लिया।