28 Jan 2026
नई दिल्ली, 28 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मनोज जैन ने कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम की चीनी नागरिकों को वीजा दिलवाने में रिश्वत लेने के मामले में आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी किया है। इसके पहले उच्च न्यायालय के तीन जज सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं। न्यायाधीश गिरीश कथपलिया, न्यायाधीश अनूप जयराम भांभानी और न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा खुद को सुनवाई से अलग कर चुके हैं। दरअसल, 23 दिसंबर, 2025 को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में कार्ति चिदंबरम समेत सात आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने और एक आरोपित को आरोप मुक्त करने का आदेश दिया था। कार्ति ने राऊज एवेन्यू कोर्ट की ओर से अपने खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कार्ति चिदंबरम के अलावा एस भास्कर रमन, मेसर्स तलवंडी साबो पावर लिमिटेड, मेसर्स बेल टूल्स लिमिटेड, विरल मेहता, अनूप अग्रवाल और मंसूर सिद्दीकी के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 204 और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 8 और 9 के तहत आरोप तय किये थे। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपित चेतन श्रीवास्तव को सभी आरोपों से मुक्त करने का आदेश दिया था। इस मामले में सीबीआई ने मई 2022 में पी चिदंबरम के आवास पर छापा मारा था। सीबीआई के केस दर्ज करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केस दर्ज किया था। सीबीआई के मुताबिक 14 मई, 2022 को पी चिदंबरम के आवास पर तलाशी के बाद मामला दर्ज किया गया था। कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि वो 2011 में अवैध रूप से 50 लाख रुपये की रिश्वत प्राप्त करने के बाद 263 चीनी नागरिकों के वीजा की सुविधा प्रदान कर रहे थे। सीबीआई ने भास्कर रमन को 18 मई, 2022 को गिरफ्तार किया था। सीबीआई के मुताबिक तलवंडी साबो पावर लिमिटेड ने बेल टूल्स लिमिटेड को 50 लाख की राशि का भुगतान किया, जिसने इसे चीनी वीजा के लिए रिश्वत के रूप में एस भास्कर रमन को दिया था।