14 Feb 2026
कहा- डीजीपी खुद देखेंगे मामला, बीकानेर एसपी को याचिकाकर्ता को सुरक्षा उपलब्ध करवाने के निर्देश जोधपुर, 14 फरवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक गंभीर मामले में सुनवाई करते हुए बीकानेर के एक पीडि़त परिवार को तत्काल और प्रभावी पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का कड़ा आदेश दिया है। मामला राजस्थान पुलिस सेवा के अधिकारी संजय बोथरा और कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा से जुड़ी धमकियों का है, जिसमें कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह विवाद साल 2016 से शुरू हुआ था, जब याचिकाकर्ता अल्ताफ बानो के परिवार के सदस्यों को तत्कालीन थानाधिकारी संजय बोथरा (वर्तमान में डिप्टी एसपी, ट्रैफिक, अजमेर) द्वारा कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई। बीकानेर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 2018 में इस मामले में संजय बोथरा के खिलाफ अपराधों पर संज्ञान लिया था। जब ट्रायल कोर्ट में अभियोजन पक्ष के सबूतों का चरण आया, तो आरोप है कि अधिकारी ने कानूनी परिणामों से बचने के लिए याचिकाकर्ताओं पर समझौता करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। याचिका में चौंकाने वाला खुलासा किया गया है कि अधिकारी के इशारे पर कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा ने याचिकाकर्ता इमरान खान को व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमकियां दीं। बीस और 21 दिसंबर 2025 को रोहित गोदारा ने मोबाइल से इमरान खान को कॉल किया। गैंगस्टर ने साफ शब्दों में कहा कि अगर संजय बोथरा के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को वापस नहीं लिया गया, तो इसके परिणाम अपरिवर्तनीय और घातक होंगे। जस्टिस फरजंद अली ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि जब राज्य की मशीनरी खुद स्वीकार कर रही है कि पीडि़तों को गैंगस्टर से खतरा है, तो सुरक्षा देना विवेकाधीन नहीं, बल्कि अनिवार्य कर्तव्य है। कोर्ट ने कहा, जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो जनता का सिस्टम से विश्वास उठ जाता है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन की रक्षा करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है और वह मूकदर्शक बनकर नहीं बैठ सकता। कोर्ट ने इस मामले में प्रशासनिक उदासीनता को आड़े हाथों लेते हुए बीकानेर एसपी को निर्देश दिया है कि वे खतरे का तत्काल आंकलन करें और याचिकाकर्ताओं व उनके परिवार को निरंतर सुरक्षा प्रदान करें। इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट ने डीजीपी को सौंपी है। इसके साथ ही कोर्ट ने गृह सचिव और डीजीपी राजस्थान को इस पूरे प्रकरण की जांच एक वरिष्ठ अधिकारी से कराने और उचित आदेश पारित करने के निर्देश हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि जांच के दौरान आरोपी अधिकारी संजय बोथरा को पीडि़तों और गवाहों से पूरी तरह दूर रखा जाए ताकि ताकि जांच प्रभावित न हो। यदि पीडि़तों को कोई नुकसान होता है, तो संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।