23 Jan 2026
जयपुर, 23 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण अधिनियम को लेकर 70 साल की वृद्धा के परिवाद का अदालत की ओर से मियाद तय करने के बाद भी एसडीएम की ओर से निर्णय नहीं करने को गंभीरता से लिया है। इसके साथ ही अदालत ने परिवाद को एसडीएम द्वितीय सांगानेर से एसडीएम प्रथम में ट्रांसफर करते हुए पीठासीन अधिकारी विकास प्रजापत को 12 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है। जस्टिस अनूप कुमार की एकलपीठ ने यह आदेश केसर देवी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि मामले में कोर्ट की ओर से दो बार आदेश जारी की लंबित परिवाद को तीस दिन में तय करने को कहा था, लेकिन पीठासीन अधिकारी ने केवल तारीख देने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं की। अदालत को उम्मीद नहीं थी कि पीठासीन अधिकारी अदालत के आदेश को इस तरह से लेगें। ऐसा लगता है कि पीठासीन अधिकारी अदालती आदेश की पालना में रुचि नहीं रखते हैं। अदालत ने मंशा जताई की ऐसे अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि न्यायालय के आदेश की पालना समाज में व्यवस्था और न्याय बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। याचिका में अधिवक्ता आशीष पूनिया ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम के तहत अपने बेटे-बहु के खिलाफ एसडीएम द्वितीय सांगानेर के समक्ष मार्च, 2024 में परिवाद दिया था। जिसकी अंतिम बहस नहीं सुनने पर हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। हाईकोर्ट ने 11 नवंबर, 2024 को एसडीएम को एक माह में परिवाद पर निर्णय करने को कहा था, लेकिन एसडीएम ने इस आदेश की पालना नहीं की। इस पर वापस हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। इस पर हाईकोर्ट ने गत 15 मई को एक बार फिर एसडीएम को एक माह में निर्णय करने करने के साथ ही अधिकारी को चेतावनी भी दी। इसके बावजूद एसडीएम ने फिर भी कार्रवाई नहीं की। याचिका में कहा गया कि अदालत ने पूर्व में आदेश जारी कर एसडीएम से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन उसके जवाब से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। एसडीएम ने हाईकोर्ट को कहा था कि गत 17 नवंबर तक निर्णय किया जाएगा, लेकिन उसके बाद भी छह बार मामले पर सुनवाई टाली गई। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए संबंधित एसडीएम को तलब करते हुए विचाराधीन परिवाद को एसडीएम प्रथम में स्थानांतरित कर दिया है।