13 Feb 2026
नई दिल्ली, 13 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने चीनी नागरिकों को वीजा दिलवाने में रिश्वत लेने के मामले कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम को राहत दी है। जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने ट्रायल कोर्ट को अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज नहीं करने का अंतरिम आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। आज सुनवाई के दौरान कार्ति चिदंबरम की ओर से कहा गया कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान दर्ज करने शुरु कर दिए हैं। अगर उच्च न्यायालय के समक्ष मामला विचाराधीन है, तो ट्रायल कोर्ट को गवाहों के बयान दर्ज नहीं करने चाहिए। उसके बाद उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट को अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज नहीं करने का अंतरिम आदेश दिया। कार्ति चिदंबरम ने इस मामले में आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 28 जनवरी को सीबीआई को नोटिस जारी किया था। दरअसल, 23 दिसंबर 2025 को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में कार्ति चिदंबरम समेत एस भास्कर रमन, मेसर्स तलवंडी साबो पावर लिमिटेड , मेसर्स बेल टूल्स लिमिटेड, विरल मेहता, अनूप अग्रवाल और मंसूर सिद्दीकी के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इन सभी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 204 और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 8 और 9 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपित चेतन श्रीवास्तव को सभी आरोपों से मुक्त करने का आदेश दिया था। इस मामले में सीबीआई ने मई, 2022 में पी चिदंबरम के आवास पर छापा मारा था। सीबीआई के केस दर्ज करने के बाद ईडी ने केस दर्ज किया था। सीबीआई के मुताबिक 14 मई, 2022 को पी चिदंबरम के आवास पर तलाशी के बाद मामला दर्ज किया गया था। कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि वो 2011 में अवैध रूप से 50 लाख रुपये की रिश्वत प्राप्त करने के बाद 263 चीनी नागरिकों के वीजा की सुविधा प्रदान कर रहे थे। सीबीआई ने भास्कर रमन को 18 मई, 2022 को गिरफ्तार किया था। सीबीआई के मुताबिक तलवंडी साबो पावर लिमिटेड ने बेल टूल्स लिमिटेड को 50 लाख की राशि का भुगतान किया, जिसने इसे चीनी वीजा के लिए रिश्वत के रूप में एस भास्कर रमन को दिया था।