25 Dec 2025
नई दिल्ली, 25 दिसंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। “आज जब हम भारत की राष्ट्रीय यात्रा के दो महान स्तंभों को नमन करते हैं, तो हम उन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराते हैं, जिनके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया—राष्ट्र सर्वोपरि, सत्ता से ऊपर चरित्र और स्वयं से ऊपर सेवा।” यह बात दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने आज भारत रत्न पं. मदन मोहन मालवीय की 165वीं जयंती एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कही। इस अवसर पर उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, विधायक संजय गोयल, अशोक गोयल,उत्तरी दिल्ली नगर निगम के पूर्व महापौर जयप्रकाश तथा दिल्ली विधानसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली विधानसभा भवन ऐतिहासिक रूप से केंद्रीय विधान सभा रहा है, जहां पं. मदन मोहन मालवीय स्वयं सदस्य के रूप में उपस्थित रहे और अपने संसदीय हस्तक्षेपों के माध्यम से इतिहास का निर्माण किया। उन्होंने कहा, “इस सदन में पं. मदन मोहन मालवीय द्वारा दिए गए लगभग 440 भाषण आज भी संरक्षित हैं, जो उनकी बौद्धिक गहराई, नैतिक साहस और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता के साक्ष्य हैं।” अध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि शिक्षा, चरित्र और राष्ट्रीय उद्देश्य पर आधारित मालवीय जी का भारत-दर्शन आज भी देश की लोकतांत्रिक यात्रा का मार्गदर्शन करता है।
पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनका प्रेरणादायी नेतृत्व, काव्यात्मक संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति आस्था आज भी देश के लिए नैतिक दिशासूचक बनी हुई है। उन्होंने कहा, “यह दिवस ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जो हमें यह स्मरण कराता है कि सुशासन ही राष्ट्र की सबसे बड़ी सेवा है। आज जब हम पं. मालवीय जी के राष्ट्र-निर्माण में योगदान को स्मरण करते हैं, वहीं हम वाजपेयी के उस योगदान को भी नमन करते हैं, जिसने एक आत्मविश्वासी और आधुनिक भारत की नींव रखी।”
गुप्ता ने इन दोनों महान राष्ट्रीय विभूतियों द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा, “आज हम उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लेते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुशासन और ‘विकसित भारत–2047’ के विज़न को अवश्य साकार किया जाएगा। इन महान विभूतियों की विरासत हमें पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित शासन के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देती है।”