12 Jun 2026
नई दिल्ली, 12 जून (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन, मिशन लाइफ (LiFE) और विकसित भारत @2047 के विजन को आगे बढ़ाते हुए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने किआ इंडिया और इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) के सहयोग से ‘प्रोजेक्ट डीआरओपी’ (Develop Responsible Outlook for Plastic) का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को सुदृढ़ करना, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना और नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने पुनर्चक्रित प्लास्टिक से निर्मित डीआरओपी सामुदायिक कूड़ेदानों का लोकार्पण किया और प्लास्टिक कचरा संग्रहण वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक अपशिष्ट के संग्रहण, पृथक्करण और पुनर्चक्रण की सुव्यवस्थित व्यवस्था की शुरुआत हो गई।
इस अवसर पर चहल ने कहा कि एनडीएमसी क्षेत्र से वर्ष 2014 में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत हुई थी और यहां संचालित प्रत्येक स्वच्छता एवं पर्यावरणीय पहल राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश देती है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे लेकिन सार्थक प्रयास ही बड़े बदलाव की नींव रखते हैं।
उन्होंने बताया कि एनडीएमसी वर्ष 2021 से आईपीसीए के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य कर रही है। इस सहयोग के तहत 115 एरोबिन स्थापित किए गए हैं, 62,958 किलोग्राम गीले कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया गया है तथा 10,013 किलोग्राम कम्पोस्ट का उत्पादन हुआ है। अब इसी साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए डीआरओपी परियोजना के तहत पूरे एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक कचरा संग्रहण के लिए विशेष डिब्बे लगाए जाएंगे।
चहल ने विश्वास जताया कि यह परियोजना प्लास्टिक प्रदूषण कम करने, लैंडफिल पर भार घटाने तथा स्वच्छ और हरित नई दिल्ली के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह पहल देशभर में पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामुदायिक सहभागिता का आदर्श मॉडल बन सकती है।
एनडीएमसी परिषद सदस्य अनिल वाल्मीकि ने कहा कि प्लास्टिक अपशिष्ट न केवल पर्यावरण बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि सरकार और स्थानीय निकायों के प्रयास तभी सफल होंगे जब नागरिक प्लास्टिक कचरे के पृथक्करण और उचित निस्तारण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने आरडब्ल्यूए, मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन और सामाजिक संगठनों से इस अभियान में सहयोग की अपील की।
किआ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (सेल्स एवं मार्केटिंग) अतुल सूद ने कहा कि तेजी से विकसित होते शहरी क्षेत्रों में टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की आवश्यकता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि किआ इंडिया इस परियोजना के माध्यम से जिम्मेदार प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और व्यवहारगत बदलाव को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
आईपीसीए के सचिव अजय गर्ग ने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। आईपीसीए की उपनिदेशक डॉ. राधा गोयल ने परियोजना के क्रियान्वयन ढांचे और इसके संभावित प्रभावों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में एनडीएमसी परिषद सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, आरडब्ल्यूए एवं मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में हितधारकों ने भाग लिया। सभी ने स्वच्छ, हरित और टिकाऊ नई दिल्ली के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों की प्रतिबद्धता दोहराई।