05 Jun 2026
अगस्त्यमुनि, 06 जून (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। केदारघाटी की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। पहली बार क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से उन्हें अपने आसपास के जंगलों, पहाड़ों, नदियों, पक्षियों, जैव विविधता, लोककथाओं और सांस्कृतिक धरोहर की गहन जानकारी दी जाएगी।
शुक्रवार को अगस्त्यमुनि के साऊदी स्थित क्रौंच हिल्स में इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। उत्तराखण्ड सरकार और पर्यटन एवं आतिथ्य कौशल परिषद (THSC) के सहयोग से आयोजित इस पहल का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को प्रकृति आधारित पर्यटन से जोड़ना और उन्हें पेशेवर नेचुरलिस्ट के रूप में तैयार करना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता अनूप सेमवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की असली पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और लोक परम्पराओं में निहित है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय युवा अपने क्षेत्र की विशेषताओं को बेहतर ढंग से समझ लें तो वे पर्यटकों के लिए एक उत्कृष्ट मार्गदर्शक बन सकते हैं और साथ ही स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित कर सकते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार हरीश गुसाईं ने प्रतिभागियों को केदारनाथ क्षेत्र की लोककथाओं, धार्मिक मान्यताओं और कम चर्चित पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने देवरियाताल सहित आसपास के कई नेचर ट्रेल्स का उल्लेख करते हुए कहा कि केदारघाटी में अनेक ऐसे आकर्षक स्थल मौजूद हैं, जिनकी जानकारी अभी भी सीमित लोगों तक ही पहुंची है। उन्होंने युवाओं से अपने गांवों की कहानियों, परम्पराओं और प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़ीं। उन्होंने कहा कि अगस्त्यमुनि और उसके आसपास का क्षेत्र ट्रेकिंग, नेचर वॉक और एडवेंचर गतिविधियों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न प्राकृतिक स्थलों और ट्रेल्स का प्रत्यक्ष अनुभव लेने की सलाह दी।
कार्यक्रम में अगस्त्यमुनि व्यापार मंडल के अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह नेगी और वरिष्ठ भाजपा नेता उमेश चंद्र कांडपाल ने भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक पर्यटन के बढ़ते दायरे के बीच स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं तथा ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षेत्रीय पर्यटन को नई मजबूती प्रदान करेंगे।
प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को पक्षी पहचान, जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय संस्कृति, प्रकृति की व्याख्या, ट्रेकिंग मार्गों की जानकारी और पर्यटकों के साथ प्रभावी संवाद जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम की खासियत यह है कि इसमें कक्षागत अध्ययन के साथ-साथ क्षेत्र भ्रमण के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव भी शामिल किया गया है।
समर्पित मीडिया सोसायटी द्वारा संचालित इस कार्यक्रम के संयोजक पंकज शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षित नेचुरलिस्ट भविष्य में न केवल पर्यटकों का मार्गदर्शन करेंगे, बल्कि केदारघाटी की प्रकृति, संस्कृति और लोकजीवन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उद्घाटन समारोह में स्थानीय लोगों और प्रतिभागियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई युवाओं ने कहा कि पहली बार उन्हें अपने ही क्षेत्र की प्रकृति, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को इतनी गहराई से जानने और समझने का अवसर मिल रहा है।
प्रकृति संरक्षण, स्थानीय रोजगार और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल केदारघाटी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।