02 Jun 2026
नई दिल्ली, 2 जून (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कृषि भवन, नई दिल्ली में दक्षिण-पश्चिम मानसून, संभावित अल नीनो प्रभाव, जल उपलब्धता, बीज व्यवस्था, फसल रणनीति और राज्यों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को पूरी गंभीरता, समन्वय और अग्रिम योजना के साथ काम करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी प्रतिकूल मौसमीय स्थिति में किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान पर चर्चा करते हुए बताया गया कि वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रह सकता है और देशभर में वर्षा दीर्घकालीन औसत का लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। साथ ही मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना भी जताई गई है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं और राज्यों को सतर्क मोड में रहने को कहा है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और मौसम संबंधी पूर्वानुमानों को पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार पूरी तरह सतर्क है और किसानों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना था कि बेहतर जल प्रबंधन, उन्नत तकनीक, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जलवायु-सहनशील कृषि उपायों के माध्यम से संभावित चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
बैठक में यह भी बताया गया कि वर्तमान में देश के जलाशयों की स्थिति संतोषजनक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जलाशयों में जल भंडारण सामान्य स्तर के 127.01 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो खरीफ सीजन की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिए कि जिन राज्यों और जिलों में कम वर्षा, लंबे ड्राई स्पेल या अल नीनो का अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है, वहां विशेष निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर आकस्मिक योजनाओं को सक्रिय किया जाए और उन्हें केवल औपचारिक दस्तावेज न मानकर जमीनी स्तर पर लागू किया जाए।
सरकार क्षेत्र-विशिष्ट और फसल-विशिष्ट रणनीति पर विशेष जोर दे रही है। श्री चौहान ने कहा कि किसानों को समय पर सलाह, गुणवत्तापूर्ण बीज, संसाधन और वैकल्पिक फसल विकल्प उपलब्ध कराए जाएं। जहां आवश्यकता हो, वहां देरी से बुवाई की रणनीति, सूखा-सहनशील किस्मों और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाए।
बीज उपलब्धता की समीक्षा के दौरान बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए आवश्यकता से अधिक बीज उपलब्ध हैं तथा आकस्मिक परिस्थितियों के लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व भी तैयार रखा गया है। कृषि मंत्री ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि किसानों तक प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज समय पर पहुंचें।
उन्होंने ग्रामीण विकास तंत्र की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि खेतों में नमी संरक्षण, जल-संरक्षण, खेत-तालाब निर्माण और स्थानीय जल संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए। उनका कहना था कि कम वर्षा की स्थिति में भी प्रभावी जल प्रबंधन और नमी संरक्षण उपायों से फसलों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
बैठक में रोग एवं कीट प्रबंधन पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिए कि मौसमीय बदलाव के कारण बढ़ने वाले संभावित रोगों और कीट प्रकोपों की अग्रिम पहचान, निगरानी और उपचार संबंधी सलाह पहले से तैयार कर राज्यों और किसानों तक पहुंचाई जाए।
शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को किसानों तक मोबाइल संदेशों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, कॉल सेंटर और स्थानीय प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से समय पर जानकारी और सलाह पहुंचाने की व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्यों की तैयारियों की लगातार समीक्षा की जाएगी और जहां अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होगी, वहां केंद्र सरकार सक्रिय रूप से सहायता प्रदान करेगी।
बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल संभावित जोखिमों का आकलन करना नहीं, बल्कि समय रहते ऐसे सभी कदम उठाना है जिससे किसानों का आत्मविश्वास बना रहे, खेती की निरंतरता प्रभावित न हो और खरीफ सीजन सुचारु रूप से आगे बढ़ सके। उन्होंने विश्वास जताया कि मजबूत समन्वय, पर्याप्त संसाधनों और वैज्ञानिक रणनीति के बल पर मौसम संबंधी चुनौतियों का प्रभाव न्यूनतम रखा जा सकेगा।