12 Jun 2026
जयपुर, 12 जून (एजेंसी)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में तत्कालीन जलदाय मंत्री महेश जोशी को एसीबी की ओर से गिरफ्तार करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस उमाशंकर व्यास और जस्टिस अशोक कुमार जैन ने यह आदेश महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में बताया कि एसीबी ने मामले में गत 7 मई को उसके पिता महेश जोशी को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान उसके परिजनों को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप से नहीं बताए गए। जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में प्रावधान है कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तार करने के कारणों की जानकारी लिखित रूप में उसके परिजनों को दी जाएगी। याचिका में कहा गया कि एसीबी की ओर से लिखित में परिजनों को यह जानकारी नहीं देने से यह गिरफ्तारी ही अवैध हो गई है। ऐसे में उन्हें दिया गया पुलिस रिमांड और उसके बाद की कार्रवाई दूषित हो गई हैं। ऐसे में उन्हें रिहा किया जाए। जिसका विरोध करते हुए महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि समान आधार पर निचली अदालत ने महेश जोशी के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। महेश जोशी को हिरासत में लेते समय उसके परिजन मौके पर मौजूद थे। वहीं बाद में उन्हें गिरफ्तार करने के दौरान उनके परिजनों को सूचित किया गया था। इसके बाद जब उन्हें अदालत में पेश करने के लिए ले जाया गया तो एसीबी मुख्यालय से रवाना होते समय और कोर्ट पहुंचने के बाद फोन के जरिए याचिकाकर्ता को इसकी सूचना दी गई थी। एसीबी की ओर से कहा गया कि मुख्यालय की ओर से जारी हुकमनामा में गिरफ्तारी के आधार थे। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाए। गौरतलब है कि जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में एसीबी ने गत 7 मई की सुबह महेश जोशी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें कुछ दिन पुलिस अभिरक्षा में रखते हुए बाद में न्यायिक अभिरक्षा के तहत जेल भेज दिया था। इससे पूर्व उन्हें इसी मामले में ईडी की ओर से भी गिरफ्तार किया गया था। तब उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। यह सारा मामला साल 2021 में जल जीवन मिशन के तहत श्री श्याम ट्यूबवैल व श्री गणपति ट्यूबवैल के संचालकों की ओर से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर करोडों रुपए के टेंडर लेने का है।