03 May 2026
नई दिल्ली, 03 मई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने रविवार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा पर आयोजित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान बच्चों में ‘मधुमेह मेलिटस’ (डायबिटीज) के प्रबंधन के लिए एक विस्तृत राष्ट्रीय मार्गदर्शिका जारी की। इस पहल के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने बचपन में होने वाले मधुमेह को अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल किया है। मंत्रालय के अनुसार, इस दस्तावेज़ के जरिए पहली बार देश में बाल मधुमेह की जांच, निदान और उपचार के लिए एक मानकीकृत राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के सभी बच्चों की सार्वभौमिक जांच सुनिश्चित करना है। योजना के तहत सामुदायिक स्तर और स्कूलों में प्रारंभिक पहचान के बाद संदिग्ध बच्चों को जिला स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजा जाएगा। सरकार ने इस पहल के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में व्यापक सहायता पैकेज की भी घोषणा की है। इसमें निःशुल्क स्क्रीनिंग और जांच सेवाएं, आजीवन मुफ्त इंसुलिन थेरेपी, ग्लूकोमीटर और टेस्ट स्ट्रिप्स जैसे जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका मकसद खासकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है। जल्दी पहचान को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने “4 टी” ढांचे पर जोर दिया है, ताकि माता-पिता और शिक्षक शुरुआती लक्षणों को आसानी से पहचान सकें। इनमें बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, अत्यधिक थकान या सुस्ती महसूस होना और अचानक वजन कम होना शामिल हैं। दिशा-निर्देशों में केवल उपचार ही नहीं, बल्कि परिवारों के सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें इंसुलिन देने की सही तकनीक, नियमित निगरानी और आपात स्थिति में प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। मंत्रालय का मानना है कि इस समग्र दृष्टिकोण से देश में बाल मधुमेह के मामलों की समय पर पहचान और बेहतर उपचार संभव हो सकेगा, जिससे बच्चों का स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता बेहतर होगी।