15 May 2026
-हर्षिल घाटी में 15 दिवसीय नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न, प्रतिभागियों को बांटे गए प्रमाण पत्र
उत्तरकाशी, 15 मई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उत्तरकाशी की खूबसूरत हर्षिल घाटी के बगोरी गांव में गुरुवार को 15 दिवसीय “वाइब्रेंट विलेज नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम” का उत्साहपूर्ण समापन हुआ। पंचायत भवन, बगोरी में आयोजित समापन एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डी. पी. बलूनी उपस्थित रहे, जबकि पूनम चंद विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्तराखंड पर्यटन विभाग एवं पर्यटन और आतिथ्य कौशल परिषद के सहयोग से आयोजित किया गया। इसमें हर्षिल घाटी और उत्तरकाशी जनपद के विभिन्न गांवों — मुखवा, बगोरी, धराली, वीरपुर डुंडा, झाला, सुक्की, रणारी, जसपुर, बारसाली और सिंगोट सहित आसपास के क्षेत्रों के 40 युवाओं ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को क्लासरूम अध्ययन के साथ व्यवहारिक एवं फील्ड आधारित प्रशिक्षण भी दिया गया। युवाओं को गर्तांग गली और मुखवा ट्रैक का फील्ड विजिट कराया गया, जहां उन्होंने हिमालयी जैव विविधता, स्थानीय संस्कृति, ट्रेकिंग रूट्स, इको-टूरिज्म और जिम्मेदार पर्यटन की व्यावहारिक जानकारी हासिल की।
कार्यक्रम में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया। इनमें बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. शेख नवाज अली, एबरडीन यूनिवर्सिटी की वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. लिडिया सैम, कच्छ विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. सीमा बी. शर्मा तथा बीएसआईपी के प्रोजेक्ट एसोसिएट बेंजामिन सी. सैम शामिल रहे।
इसके अलावा हर्षिल घाटी के रेंजर आदेश यशवंत चौहान ने भी प्रतिभागियों को वन संरक्षण, हिमालयी पारिस्थितिकी और जिम्मेदार प्रकृति पर्यटन पर विशेष जानकारी दी। विशेषज्ञों ने जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता, सतत पर्यटन, पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और प्रकृति संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें स्थानीय महिलाओं और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। ग्राम प्रधान बगोरी रंजीता डोगरा भी समारोह में मौजूद रहीं।
मुख्य अतिथि डी. पी. बलूनी ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशिक्षित युवा भविष्य में उत्तराखंड की पर्यटन पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
विशिष्ट अतिथि पूनम चंद ने कहा कि “वाइब्रेंट विलेज” पहल के माध्यम से सीमांत गांवों को पर्यटन और स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं की सक्रिय भागीदारी इस पहल की सबसे बड़ी सफलता है।
कार्यक्रम का संचालन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का क्रियान्वयन समर्पित मीडिया सोसाइटी के पंकज शर्मा द्वारा किया गया। समारोह में स्थानीय ग्रामीण, विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और प्रशिक्षण से जुड़े कई लोग उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में प्रतिभागियों का उत्साह और ऊर्जा आकर्षण का केंद्र रही।