12 Jun 2026
मुंबई, 12 जून (एजेंसी)। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले के प्रमुख आरोपितों में शामिल माओवादी विचारक प्रोफेसर पी. वरवर राव ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मुंबई से स्थायी रूप से हैदराबाद स्थानांतरित होने की अनुमति मांगी है। उन्होंने अपनी बढ़ती आर्थिक परेशानियों, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और पारिवारिक सहयोग की आवश्यकता को इस मांग का आधार बनाया है। याचिका में वरवर राव ने अदालत को बताया कि मुंबई में रहना उनके लिए आर्थिक रूप से कठिन होता जा रहा है। उनके अनुसार, मुंबई में रहने और चिकित्सा देखभाल पर प्रति माह करीब 77 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि उनकी मासिक पेंशन केवल 50 हजार रुपये है। ऐसे में लगातार बढ़ रहा आर्थिक बोझ उनके लिए चिंता का विषय बन गया है। राव ने यह भी कहा कि उनकी पत्नी, बेटी और पोती हैदराबाद में रहती हैं। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए परिवार के साथ रहना उनके लिए आवश्यक है। उन्होंने अदालत को बताया कि हैदराबाद में उनके नियमित चिकित्सक भी हैं, जो लंबे समय से उनका इलाज कर रहे हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति से भली-भांति परिचित हैं। गौरतलब है कि 16 मार्च 2026 को विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने उनके स्थायी स्थानांतरण संबंधी अनुरोध को खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि उच्चतम न्यायालय ने उन्हें केवल अस्थायी रूप से हैदराबाद जाने की अनुमति दी थी, स्थायी रूप से वहां बसने की नहीं। अब बॉम्बे उच्च न्यायालय में दायर अपील में वरवर राव ने एनआईए अदालत के फैसले को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि उनकी आयु, लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और आर्थिक कठिनाइयों को देखते हुए जमानत की शर्तों का उद्देश्य उन्हें अनिश्चितकाल तक मुंबई में रहने के लिए बाध्य करना नहीं था। उन्होंने अदालत से मानवीय आधार पर राहत प्रदान करते हुए हैदराबाद में स्थायी रूप से निवास करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। उल्लेखनीय है कि वरवर राव को वर्ष 2018 में महाराष्ट्र के चर्चित भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार किया गया था। स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के चलते उन्हें वर्ष 2021 में चिकित्सीय आधार पर सशर्त जमानत दी गई थी। बाद में उच्चतम न्यायालय ने उनकी जमानत अवधि बढ़ा दी थी, लेकिन जमानत की शर्तों के तहत उन्हें अदालत की अनुमति के बिना मुंबई छोड़ने की इजाजत नहीं दी गई। एक जनवरी 2018 को पुणे के निकट हुई भीमा कोरेगांव हिंसा और कथित माओवादी गतिविधियों से जुड़े इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों सहित कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपितों में सामाजिक कार्यकर्ता और पादरी फ़ादर स्टेन स्वामी भी शामिल थे, जिनकी वर्ष 2021 में न्यायिक हिरासत के दौरान मृत्यु हो गई थी। वर्तमान में मामले के सभी आरोपित जमानत पर हैं। अब इस मामले पर बॉम्बे उच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार है। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि वरवर राव को मुंबई छोड़कर स्थायी रूप से हैदराबाद में रहने की अनुमति मिलती है या नहीं। इस याचिका पर कानूनी और सामाजिक दोनों ही हलकों की नजर बनी हुई है।