27 Apr 2026
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने 15 साल तक लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला की ओर से यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने पर सवाल उठाया है। जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि 15 साल साथ रहे, बच्चा भी है, अब यौन उत्पीड़न का आरोप क्यों लगा रही हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला से कहा कि जब कोई रिश्ता आपसी सहमति से बना हो तो उसमें अपराध का सवाल कहां उठता है। महिला ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसके पूर्व लिव-इन पार्टनर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया गया था। महिला ने लिव-इन पार्टनर के खिलाफ शादी का झूठा वादा कर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। कोर्ट ने कहा कि दोनों 15 साल तक साथ रहे, महिला का उस पुरुष से एक बच्चा भी है, लेकिन उनकी शादी नहीं हुई। इतने सालों के लिव-इन रिलेशनशिप के बाद यौन उत्पीड़न का आरोप कैसे लगा रही हैं। महिला की ओर से पेश वकील ने कहा कि आरोपित ने शादी करने का वादा किया था और उसका यौन शोषण किया था। तब कोर्ट ने पूछा कि शादी के पहले ही वो उस पुरुष के साथ जाकर क्यों रहने लगी।