22 May 2026
लोहाजंग (चमोली), 22 मई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। लोहाजंग में विश्व प्रसिद्ध मां नंदा देवी राजजात यात्रा मार्ग एवं रूपकुंड ट्रैक के प्रमुख बेसकैंप पर शुक्रवार को नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम उत्तराखंड पर्यटन विभाग, पर्यटन एवं आतिथ्य कौशल परिषद (THSC) तथा समर्पित मीडिया सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं, महिलाओं और स्थानीय समुदाय को पर्यटन, प्रकृति संरक्षण और स्वरोजगार से जोड़ना है। प्रशिक्षण के पहले दिन लोहाजंग एवं आसपास के गांवों से पहुंचे प्रतिभागियों को प्रकृति, पर्यटन और स्थानीय संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, मुंडोली के शाखा प्रबंधक नितिन सैनी और बाजार संघ अध्यक्ष प्रद्युम्न पुजारी रहे। इस अवसर पर सहकारी समिति अध्यक्ष गब्बर सिंह तथा गोल्ज्यू देवता के पुजारी जयवीर सिंह पंचोली भी उपस्थित रहे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड पर्यटन विभाग की अतिरिक्त निदेशक पूनम चंद ने कहा कि राज्य सरकार ट्रैकिंग मार्गों पर विशेष रूप से गढ़वाल क्षेत्र में “छानियों” के विकास और अंतिम गांवों में ट्रैकिंग एवं ट्रैक्शन सेंटर स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं से स्थानीय युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को पर्यटन आधारित स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में आयोजित ऐसे कौशल विकास कार्यक्रम युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खोल रहे हैं। साथ ही प्रतिभागियों को जिम्मेदार और प्रकृति के प्रति संवेदनशील नेचुरलिस्ट बनने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में स्थानीय युवाओं की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण को रोजगार के साथ-साथ प्रकृति और संस्कृति संरक्षण का सशक्त माध्यम बताया।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि कई ग्राम प्रधान स्वयं प्रशिक्षणार्थी के रूप में शामिल हुए। ग्राम प्रधान लखपत सिंह दानू, ग्राम पिनाऊ के ग्राम प्रधान हीरा दानू तथा ग्राम प्रधान लोहाजंग ने प्रशिक्षण में भाग लेकर युवाओं को प्रेरित किया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जैव विविधता, हिमालयी वनस्पति एवं वन्यजीवों की जानकारी, ट्रैकिंग मार्ग, पर्यटक व्यवहार, प्राथमिक चिकित्सा, स्थानीय इतिहास, लोक संस्कृति और संचार कौशल जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
स्थानीय लोगों और प्रतिभागियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के युवाओं के लिए नई उम्मीद और पर्यटन आधारित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।