12 May 2026
कोलकाता, 12 मई (एजेंसी)। तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद राज्य में कथित चुनाव बाद हिंसा को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी की ओर से दायर जनहित याचिका में अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। तृणमूल सांसद और अधिवक्ता कल्याण बनर्जी के पुत्र तथा वकील सिर्सन्या बनर्जी ने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए शीघ्र सुनवाई की मांग की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चार मई को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में भड़की हिंसा में दो हजार से अधिक तृणमूल कार्यकर्ता और समर्थक घायल हुए हैं। साथ ही दावा किया गया कि पार्टी के लगभग 365 कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि चुनाव बाद हिंसा रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप किया जाए। इसके अलावा राज्यभर में तृणमूल कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमलों की उपयुक्त एजेंसी से जांच कराने और शांति व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए जाएं। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने संकेत दिया कि मामले पर अगले गुरुवार को सुनवाई हो सकती है। मुर्शिदाबाद और पश्चिम मेदिनीपुर जिलों में लेनिन की प्रतिमाएं तोड़े जाने के आरोप लगे थे। वहीं, कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके स्थित हॉग मार्केट में तृणमूल के पार्टी कार्यालय को बुलडोजर से ध्वस्त किए जाने के भी आरोप सामने आए थे। इसी मुद्दे पर एक अन्य जनहित याचिका भी उच्च न्यायालय में दायर की गई है, जिसमें राज्य में सरकार बदलने के बाद अलग-अलग स्थानों पर चुनाव बाद हिंसा की घटनाएं होने का आरोप लगाया गया है। तृणमूल नेताओं की ओर से भी सामाजिक माध्यमों पर कथित हिंसा के कई वीडियो साझा किए गए हैं। अधिवक्ता ऋतांकर दास ने भी पहले उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मामले में तत्काल हस्तक्षेप और सुनवाई की मांग की थी। अब तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी इसी मुद्दे पर अलग से मामला दायर किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।