31 May 2026
लखनऊ, 31 मई ( इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को राज्य का पूर्णकालिक (फुल टाइम) पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश में लगभग चार वर्षों से जारी कार्यवाहक डीजीपी की व्यवस्था समाप्त हो गई है। राजीव कृष्ण अब उत्तर प्रदेश पुलिस के स्थायी मुखिया के रूप में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, पुलिस आधुनिकीकरण और आगामी चुनौतियों की कमान संभालेंगे।
राज्य सरकार ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे गए पैनल पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया। राजीव कृष्ण वर्ष 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और पिछले लगभग एक वर्ष से कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। अधिकारियों के अनुसार उनकी प्रशासनिक कार्यशैली, अपराध नियंत्रण में अनुभव तथा सरकार के साथ बेहतर समन्वय को नियुक्ति का प्रमुख आधार माना गया है।
राजीव कृष्ण का जन्म 26 जून 1969 को हुआ था। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में सेवा शुरू की। अपने लंबे करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां निभाईं। उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक समेत कई प्रतिष्ठित सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में मई 2022 में तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल के पद से हटने के बाद से राज्य को स्थायी डीजीपी नहीं मिल पाया था। इसके बाद लगातार कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किए जाते रहे। इस दौरान डीएस चौहान, आरके विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार और बाद में राजीव कृष्ण ने कार्यवाहक प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और यूपीएससी के बीच प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रही। मार्च 2026 में भेजे गए प्रस्ताव पर तकनीकी आपत्तियां भी सामने आई थीं, जिसके बाद संशोधित प्रक्रिया के तहत नए सिरे से पैनल तैयार किया गया। अंततः यूपीएससी द्वारा योग्य अधिकारियों के नामों का पैनल भेजे जाने के बाद राज्य सरकार ने राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लगा दी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। राजीव कृष्ण का कार्यकाल जून 2029 तक शेष है, ऐसे में उन्हें अपेक्षाकृत लंबा कार्यकाल मिलने की संभावना है, जिससे प्रदेश पुलिस नेतृत्व में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।