09 May 2026
जयपुर, 09 मई (एजेंसी)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने साइबर फ्रॉड की शिकायतों के मामलों में बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी खाते में कथित विवादित राशि आने से पर पूरे बैंक खाते को फ्रीज करना सही नहीं है। जांच एजेंसियां अथवा बैंक केवल विवादित राशि तक ही रोक लगाने के लिए अधिकृत हैं। अदालत ने कहा कि खाते में उपलब्ध बाकी राशि के संचालन पर पाबंदी लगाना संवैधानिक व व्यापारिक अधिकारों पर अतिक्रमण है। जस्टिस विनोद कुमार भारवानी ने यह आदेश सरपंच फीलिंग स्टेशन के प्रोपराइटर बनवारी लाल जाट की याचिका पर दिया। अदालत ने बैंक को निर्देश दिया कि वह प्रार्थी के खाते में विवादित राशि छोडकर खाते को तीन दिन में डी-फ्रीज करें और उसे बैंक खाते के सामान्य संचालन की अनुमति दी जाए। याचिका में अधिवक्ता अधिवक्ता प्रेमचंद देवन्दा व अभिषेक देवंदा ने बताया कि प्रार्थी पेट्रोल पंप संचालक है। उसके बैंक ऑफ महाराष्ट्र के चालू खाते को कर्नाटक, पश्चिम बंगाल व गुजरात से मिली साइबर फ्रॉड शिकायतों पर फ्रीज कर दिया। जिससे उसके खाते में जमा 7.5 लाख रुपए फ्रीज हो गए। इससे पेट्रोल पंप के दैनिक संचालन, कर्मचारियों के वेतन व सप्लायर्स के भुगतान सहित अन्य व्यापारिक गतिविधियों प्रभावित हो रही हैं। जबकि उसने कोई फ्रॉड नहीं किया है। किसी तीसरे पक्ष के यूपीआई के जरिए उनके खाते में अवैध ट्रांजेक्शन हुआ है तो वो जिम्मेदार नहीं हैं। यह विवादित राशि सीमित है और बैंक खाते की ज्यादातर राशि वैध व्यावसायिक लेन-देन की है। इसलिए पूरे बैंक खाते व 7 लाख रुपए फ्रीज करना मनमाना है।