08 May 2026
- नेहरू सेंटर मुंबई में 'शतायु संघ और महिला सहभागिता' पर विशेष चर्चा
मुंबई, 08 मई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। लेखिका एवं सुप्रसिद्ध समाजसेविका डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से उपजे विचार और कार्य पूरी तरह से महिला केंद्रित हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला के सक्रिय योगदान के बिना परिवार, समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है।
डॉ. शोभा विजेंद्र गुरुवार को यहां वर्ली स्थित नेहरू सेंटर के 'हॉल ऑफ हार्मनी' में आयोजित ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ विषय पर एक सारगर्भित चर्चा के दौरान बोल रही थीं। इस कार्यक्रम का आयोजन कमला ट्रस्ट के सहयोग से किया गया था। अपनी पुस्तक ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ का संदर्भ देते हुए डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि संघ और राष्ट्र सेविका समिति क्रमशः पुरुष और महिलाओं के माध्यम से व्यक्ति निर्माण का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "मेरी यह पुस्तक प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर यह सिद्ध करती है कि संघ में महिलाओं की भूमिका केवल सहभागिता तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मां, मातृभूमि और जगन्माता के स्वरूप में विद्यमान है।" उन्होंने आह्वान किया कि 21वीं शताब्दी में स्त्री और पुरुष दोनों को अपने 'स्व' को जागृत करना होगा।
स्त्री-पुरुष परस्पर पूरक: वर्षा तावड़े
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं वर्षा तावड़े ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि कैसे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के माध्यम से उनका जुड़ाव संघ के विचारों से हुआ। उन्होंने कहा कि संघ स्त्री बनाम पुरुष के संघर्ष में विश्वास नहीं रखता, बल्कि दोनों को एक-दूसरे का पूरक मानता है।
वहीं, निदर्शना गोवानी ने महिला शक्ति और संगठनात्मक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस दक्षता से महिलाएं घर की जिम्मेदारियां संभालती हैं, उसी समर्पण के साथ वे संगठन में भी बड़ी भूमिकाएं निभा रही हैं।
संघ और महिला कार्य: मुख्य वक्ता के विचार
महिला समन्वय की अखिल भारतीय सह संयोजक और मुख्य वक्ता भाग्यश्री (चंदा) साठये ने कहा कि संघ में महिलाएं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों रूपों में सक्रिय हैं। उन्होंने आपातकाल के दौरान महिलाओं के संघर्ष और वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से हो रहे कार्यों की विस्तार से चर्चा की।
भ्रम की काट है यह पुस्तक: प्रदीप जोशी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदीप जोशी ने कहा कि संघ के बारे में समाज में कई भ्रम फैलाए गए हैं और डॉ. शोभा विजेंद्र की यह पुस्तक उन भ्रामक धारणाओं की एक सशक्त काट है। उन्होंने कहा कि संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि पूरे समाज को साथ लेकर चलने वाली एक शक्ति है।
नीति निर्माण में बढ़े महिलाओं की भागीदारी: गीता ताई गुंडे
कार्यक्रम के समापन पर विचार रखते हुए प्रसिद्ध विचारक गीता ताई गुंडे ने कहा कि आज महिलाएं ऊंचे पदों पर तो पहुंच रही हैं, लेकिन नीति निर्माण और राजनीति में उनकी संख्या अभी भी कम है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समाज का महिलाओं की निर्णय क्षमता पर विश्वास बढ़ना चाहिए और महिलाओं को भी अपनी क्षमताओं को और विकसित कर नेतृत्व में आगे आना चाहिए।