08 May 2026
नई दिल्ली, 8 मई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने शुक्रवार को “रोड पॉल्यूशन कंट्रोल” प्रोग्राम शुरू किया। यह दिल्ली में फैले हुए वायु प्रदूषण स्रोतों की ज़मीनी निगरानी और तेज़ समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस प्रोग्राम के तहत हर जिले में विशेष फील्ड सर्वेयर तैनात किए गए हैं, जो हर कार्यदिवस पर निगरानी अधिकारियों की देखरेख में दिल्ली की सड़कों का व्यवस्थित सर्वे करेंगे और रियल-टाइम में प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान करेंगे।
ऑपरेशनल रूप से इसे रोड रडार यानी Real-time Air Pollution Detection Across Roads के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य सड़क सफाई बेहतर करना, धूल कम करना और शहर में वायु गुणवत्ता में मापनीय सुधार लाना है।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “दिल्ली की स्वच्छ हवा की लड़ाई ज़मीन पर, गली- गली और सड़क पर जीतनी होगी। रोड RADAR के माध्यम से सरकार रोज़ाना निगरानी, रियल-टाइम रिपोर्टिंग और सीधे विभागीय जवाबदेही की वैज्ञानिक व्यवस्था लागू कर रही है, ताकि प्रदूषण स्रोतों को नज़रअंदाज़ न किया जाए और उन पर तुरंत कार्रवाई हो।”
उन्होंने आगे कहा, “मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में दिल्ली सरकार स्वच्छ हवा के बड़े मिशन पर काम कर रही है। इसमें वैज्ञानिक तरीकों, मज़बूत मॉनिटरिंग, तेज़ रिस्पॉन्स सिस्टम और ज़मीनी स्तर पर प्रभावी अनुपालन शामिल है। यह प्रोग्राम उसी व्यापक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।”
नई व्यवस्था के तहत हर जिले के 13 सर्वेयर मिलकर दिल्ली की लगभग 18,000 किमी सड़कों को कवर करेंगे। इसमें एमसीडी, नई दिल्ली नगर परिषद, लोक निर्माण विभाग और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के सभी क्षेत्र शामिल होंगे। हर महीने दिल्ली के पूरे सड़क नेटवर्क का सर्वे किया जाएगा। प्रत्येक सर्वेयर को रोज़ाना कम से कम 20 किमी सड़क का सर्वे करने की ज़िम्मेदारी दी गई है।
MCD-311 मोबाइल ऐप के माध्यम से हर सर्वेयर जियो-टैग्ड फील्ड सर्वे करेगा और रोज़ाना कम से कम 70 फोटो आधारित प्रदूषण संबंधी शिकायतें दर्ज करेगा। इस प्रकार पूरे शहर में प्रतिदिन लगभग 1,000 मुद्दों की पहचान होगी, जिससे संबंधित विभागों को लगातार ज़मीनी जानकारी मिलती रहेगी। सिस्टम में ऐसी व्यवस्था भी की गई है जिससे एक ही समस्या की दोबारा शिकायत दर्ज न हो और हर शिकायत एक अलग एवं कार्रवाई योग्य प्रदूषण स्रोत से जुड़ी हो।
यह प्रोग्राम वायु प्रदूषण से जुड़े 11 प्रकार के कारणों की निगरानी करेगा। इनमें कच्ची सड़कें, टूटे फुटपाथ, डिवाइडर और गड्ढों से उड़ने वाली धूल; सड़क किनारे रेत या निर्माण सामग्री; बिना पक्के और अव्यवस्थित पार्किंग स्थल; कचरा एवं ओवरफ्लो होते ढलाव; सड़क किनारे बायोमास और कचरा जलाना; प्लास्टिक जलाना; निर्माण एवं ध्वस्तीकरण का मलबा; हरियाली की आवश्यकता वाले सड़क किनारे क्षेत्र; सेंट्रल वर्ज पर हरियाली की कमी; निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल; तथा सर्वे के दौरान पहचाने गए अन्य प्रदूषण स्रोत शामिल हैं।
सिरसा ने कहा, “वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लगातार निगरानी, समय रहते पहचान और जवाबदेह प्रशासन ज़रूरी है। यह पहल सड़क की धूल, कचरा डंपिंग, खुले में जलाने और निर्माण धूल जैसे प्रदूषण स्रोतों पर तेज़ कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।”
इस सिस्टम की एक प्रमुख विशेषता इसकी ऑटोमेटेड शिकायत रूटिंग व्यवस्था है। जैसे ही कोई सर्वेयर MCD-311 ऐप पर शिकायत दर्ज करेगा, वह बिना किसी मैन्युअल हस्तक्षेप के सीधे संबंधित विभाग को भेज दी जाएगी। इनमें एमसीडी, लोक निर्माण विभाग, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी, भारतीय रेल, सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट और अन्य संबंधित एजेंसियां शामिल हैं।
यह ऑटोमेटेड व्यवस्था विभागों के बीच समन्वय बेहतर करेगी, कार्रवाई में देरी कम करेगी और शहरी प्रदूषण नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाएगी। जियो-टैग्ड प्रमाण, रोज़ाना फील्ड वेरिफिकेशन और सीधे संबंधित विभागों तक शिकायत भेजने की व्यवस्था के माध्यम से यह सिस्टम दिल्ली की सड़कों पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए अधिक जवाबदेह और तेज़ तंत्र तैयार करेगा। पर्यावरण मंत्री इस पूरे सर्वे प्रोग्राम की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करेंगे, ताकि सभी विभागों और एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “संदेश बिल्कुल साफ़ है - हर पहचाने गए प्रदूषण स्रोत पर कार्रवाई होनी चाहिए। हर विभाग जवाबदेह होगा और हर एजेंसी को अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होगी। दिल्ली के लोगों को साफ़, सुरक्षित और स्वस्थ सड़कें मिलनी चाहिए, और यह सरकार टेक्नोलॉजी आधारित एवं मापनीय प्रशासन के माध्यम से इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
“रोड पॉल्यूशन कंट्रोल” प्रोग्राम की शुरुआत के साथ दिल्ली सरकार और डीपीसीसी ने यह स्पष्ट किया है कि वे वैज्ञानिक निगरानी, तकनीकी साधनों और लगातार प्रवर्तन सहयोग के माध्यम से प्रदूषण के फैले हुए स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।