08 May 2026
नई दिल्ली, 08 मई (एजेंसी)। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान केस के गवाहों को धमकाने की सूचना मिलने पर उच्चतम न्यायालय ने नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यूपी सरकार की स्टेटस रिपोर्ट में गवाहों को पेश नहीं करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है। कोर्ट ने गवाहों को पेश नहीं करने के संबंध में यूपी सरकार से चार हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि लगभग दो महीने से इस मामले में किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं की गई है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कानूनसम्मत कदम उठाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से मामले को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की कोशिश करने और इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा। इसके पहले 9 अक्टूबर, 2025 को यूपी पुलिस ने बताया था कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के आरोपित आशीष मिश्रा के खिलाफ गवाह को धमकाने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस ने कहा कि एक गवाह को धमकाने की शिकायत मिली, जिसमें कहा गया कि आशीष मिश्रा और उसके पिता अजय मिश्रा टेनी ने धमकी दी थी। कोर्ट ने 24 मार्च 2025 को आशीष मिश्रा को मिली जमानत को वापस लेने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि ट्रायल जारी रखा जाए। उच्चतम न्यायालय ने 22 जुलाई, 2024 को आशीष मिश्रा को सशर्त जमानत दी थी। उच्चतम न्यायालय ने आशीष मिश्रा को लखनऊ में रहने की इजाजत दी थी, लेकिन वह लखीमपुर खीरी नही जाएंगे। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए इस घटना से जुड़े दूसरे केस में बंद चार किसानों को भी अंतरिम जमानत दी थी, जिन पर घटना के बाद पीट-पीटकर हत्या करने का आरोप है। उच्चतम न्यायालय ने साफ किया कि आशीष मिश्रा या उनके परिवार ने किसी भी तरह से ट्रायल को प्रभावित करने की कोशिश की, तो जमानत रद्द कर दी जाएगी। लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर, 2021 को हुई हिंसा में आठ लोगों की जान चली गई थी। इस मामले में एसआईटी ने आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपित बनाकर 3 जनवरी, 2022 को लखीमपुर की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।