22 Apr 2026
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (हि.स.)। सबरीमाला मंदिर मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि वो मंदिरों पर नियंत्रण के पक्ष में नहीं है। केंद्र सरकार ने कहा कि उसने केवल संविधान के प्रावधानों की व्याख्या की है, न कि मंदिरों पर किसी नियंत्रण की मांग की है। केंद्र सरकार ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय बेंच के समक्ष ये दलीलें दी। दरअसल, सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और मंदिर प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अनुच्छेद 25 और 26 की एक विशेष व्याख्या दी है क्योंकि सरकार मंदिरों को नियंत्रित करना चाहती है। इस पर मेहता ने अपनी दलीलों की व्याख्या का खंडन करते हुए कहा कि सरकार मंदिरों को बिल्कुल भी नियंत्रित नहीं करना चाहती है। मेहता ने कहा कि उन्होंने जो उल्लेख किया वह अनुच्छेद 25(1)(ए) की संवैधानिक व्याख्या थी जो राज्य को किसी भी धर्म की आर्थिक, राजनीतिक और धर्मनिरपेक्ष गतिविधियों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस अमानुल्लाह ने मेहता से पूछा कि क्या उनकी सरकार को मंदिरों पर नियंत्रण नहीं रखने वाली दलील केवल हिन्दू धार्मिक संस्थानों तक ही सीमित है। इस पर मेहता ने कहा कि जब कोर्ट और वकील संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या कर रहे हों तो उन्हें हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई या किसी अन्य धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता है। तब जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि व्याख्या एक नागरिक के दृष्टिकोण से होनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय की 9 जजों की संविधान बेंच ने इस मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरु की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली इस बेंच में जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस एजे मसीह, जस्टिस पीबी वराले, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल हैं। उच्चतम न्यायालय ने 28 सितंबर, 2018 को 4-1 के बहुमत से फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं के साथ काफी समय से भेदभाव होता रहा है। महिला पुरुष से कमतर नहीं है। एक तरफ हम महिलाओं को देवी स्वरुप मानते हैं दूसरी तरफ हम उनसे भेदभाव करते हैं। कोर्ट ने कहा था कि बायोलॉजिकल और फिजियोलॉजिकल वजहों से महिलाओं के धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता को खत्म नहीं किया जा सकता है।