16 Jun 2026
नई दिल्ली, 16 जून (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। पूर्वी जिला साइबर थाना पुलिस ने देशभर में साइबर ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 10 आरोपिताें को गिरफ्तार किया है। आरोपिताें के कब्जे से 11 पीओएस मशीनें, 27 चेक बुक, 17 एटीएम कार्ड और 12 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और बाद में इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने में करता था। गिरफ्तार आरोपिताें की पहचान विजय कुमार (31), प्रदीप कुमार (42), यतेंद्र कुमार (23), मुकेश (24), विनेश (37), गुरबाज सिंह (27), अमन (27), सूरज यादव (24), गौरव नाहर (22) और लक्ष्मण (33) के रूप में हुई है। आरोपित दिल्ली, हरियाणा और उप्र के विभिन्न इलाकों के रहने वाले हैं। पूर्वी जिले के पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार ने मंगलवार काे बताया कि इस संबंध में साइबर थाना पूर्वी जिले में एफआईआर संख्या 492026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 112(2) और 318(4) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, मामले का खुलासा उस समय हुआ जब केरल निवासी एक महिला से साइबर ठगी कर दो लाख रुपये की रकम हड़प ली गई। जांच में पता चला कि ठगी की यह रकम यस बैंक के एक खाते में जमा कराई गई थी। वित्तीय लेनदेन की जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित बैंक खाता एक "म्यूल अकाउंट" था, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराध से अर्जित रकम को प्राप्त करने और आगे विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। मामले की जांच के लिए महिला उपनिरीक्षक रिंकी, हेड कांस्टेबल कुलदीप, हेड कांस्टेबल पारस और महिला हेड कांस्टेबल पूनम की टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की जांच, मोबाइल फोन डेटा विश्लेषण और फील्ड वेरिफिकेशन किया। जांच के दौरान खाते के धारक योगेंद्र कुमार, निवासी जनकपुरी से पूछताछ की गई। योगेंद्र ने बताया कि उसकी मुलाकात विजय नामक व्यक्ति से हुई थी, जिसने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उससे बैंक खाता खुलवाया था। बाद में उसे पता चला कि खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम जमा करने में किया जा रहा है। इसके बाद उसने गिरोह से दूरी बना ली। पुलिस ने उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे पाबंद किया। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ, जो साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम कर रहा था। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 10 आरोपिताें को गिरफ्तार कर लिया। ऐसे करता था गिरोह काम पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह बेरोजगार युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी और आसान कमाई का लालच देता था। इनके नाम पर बैंक खाते खुलवाने के बाद आरोपी खाते की पूरी जानकारी, एटीएम कार्ड, चेक बुक, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद इन खातों को देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय साइबर ठगों को उपलब्ध कराया जाता था। ठगी की रकम इन्हीं खातों में जमा कराई जाती थी और पीओएस मशीनों, एटीएम कार्ड तथा मोबाइल फोन की मदद से रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर निकाला जाता था, ताकि असली अपराधियों की पहचान छिपाई जा सके। पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेक बुक, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी न दें। ऐसा करना साइबर अपराध को बढ़ावा देने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई का कारण भी बन सकता है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य साइबर ठगों और लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है।