16 Jun 2026
जयपुर|कोटा, 16 जून (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोग और कुछ कोचिंग संचालक विद्यार्थियों को कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं। गहलोत मंगलवार को सिविल लाइन्स पर मीडिया से बातचीत कर रहे थे। गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और किसी भी कार्यक्रम में भाग लेने की स्वतंत्रता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भय का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, जो उचित नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस युवाओं के मुद्दों, विशेषकर नीट पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर लगातार आवाज उठाती रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की चिंताओं को सुनना और उनके भविष्य से जुड़े सवालों पर चर्चा करना जरूरी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट भी लिखी। उन्होंने कहा कि कोटा में प्रशासन द्वारा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम के होर्डिंग हटाए जा रहे हैं। भाजपा के कार्यक्रमों के जब होर्डिंग लगते हैं तब यह प्रशासन पूरा सहयोग देता है। कांग्रेस के कार्यक्रम के होर्डिंग हटाना घबराई हुई भाजपा का राजनीतिक षड्यंत्र है। पहले कोचिंग संस्थानों को धमकियाँ, फिर छात्रों पर दबाव, और अब होर्डिंग हटाना, भाजपा इतनी भयभीत क्यों है? उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज़ होर्डिंग हटाने से नहीं दबेगी। इस तानाशाही के कारण ही 17 जून को कोटा में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। गहलोत ने कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा पर तंज कसते हुए कहा- मंत्री के एजेंट पकडे़ जा रहे हैं। मंत्री ने पहले भी इस्तीफा दे रखा है। करप्शन की बात पर कह रहे हैं कि उनकी भागीदारी साबित हो तो वो इस्तीफा दे सकते हैं। जबसे ये राजनीति में आए हैं, इनकी फितरत ऐसी ही रही है। किरोड़ी की यूएसपी यही है कि वे अपनी सरकारों और अपने ही मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हैं। लोगों से वादा करते हैं कि फलां कदम उठा सकते हैं। गहलोत ने कहा कि इस सरकार में मंत्रियों की क्या ही बात की जाए। उन्हाेंने कहा, उप मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री के उनके विभाग के सचिव फोन नहीं उठाते। खुद मंत्री कहते हैं कि अफसर उनके फोन नहीं उठाते। जनसुनवाई में भी यह हो चुका है कि मंत्री ने फोन किया और अफसर ने फोन नहीं उठाया। यह सरकार की हालत है।