22 Jun 2026
नई दिल्ली, 22 जून (एजेंसी)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए नई मूल्यांकन नीति लागू कर दी है। सोमवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि इन छात्रों के अंक तय करने के लिए अलग फॉर्मूला बनाया गया है। मेहता की इस सूचना के बाद जस्टिस एसवीएन भट्टी की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच ने याचिका का निस्तारण कर दिया। याचिका सऊदी अरब के अल जुबैल निवासी प्रांसु जिगरकुमार पटेल ने दायर की थी। याचिकाकर्ता 12वीं कक्षा के इंप्रूवमेंट की परीक्षा के प्राइवेट अभ्यर्थी था। याचिका में कहा गया था कि सीबीएसई ने 27 मार्च को खाड़ी देशों के प्रभावित छात्रों के लिए विशेष मूल्यांकन योजना बनाई थी, लेकिन उसमें नियमित छात्रों को शामिल किया गया था और प्राइवेट छात्रों के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई थी। इसी वजह से याचिकाकर्ता का रिजल्ट रोक दिया गया था। याचिका में कहा गया था कि सीबीएसई का ये फैसला मनमाना और भेदभावपूर्ण था। सीबीएसई के इस फैसले से याचिकाकर्ता के उच्च शिक्षा की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं। उच्चतम न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 8 जून को सीबीएसई को नोटिस जारी किया था। 13 जून को सीबीएसई ने बताया था कि याचिकाकर्ता की शिकायत के समाधान के लिए एक नीति तैयार की जाएगी। सुनवाई के दौरान मेहता ने कोर्ट को बताया कि परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों की दो श्रेणियां थीं। एक नियमित और दूसरी प्राइवेट। मेहता ने कहा कि नियमित छात्रों के लिए स्कूलों के पास आंतरिक मूल्यांकन और त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के अंक उपलब्ध थे। इनके आधार पर 27 मार्च को मूल्यांकन नीति बनाई गई थी, लेकिन प्राइवेट अभ्यर्थियों के पास ऐसा कोई स्कूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, जिसकी वजह से अलग व्यवस्था की जरुरत पड़ी। मेहता ने कहा कि अब 21 जून को सीबीएसई ने प्राइवेट अभ्यर्थियों के लिए अलग मूल्यांकन फार्मूला तैयार किया है, जिसके तहत 10वीं की बोर्ड परीक्षा के थ्योरी अंकों का 40 फीसदी और 12वीं बोर्ड परीक्षा के थ्योरी अंकों का 60 फीसदी तय किया गया। मेहता ने कहा कि अगर कोई छात्र मूल्यांकन के आधार पर दिए गए अंकों से संतुष्ट नहीं है तो वो अगली नियमित परीक्षा में शामिल हो सकता है।