01 Aug 2026
नई दिल्ली, 01 अगस्त (एजेंसी)। केंद्र सरकार ने कहा है कि किसी भी विदेशी व्यक्ति की राष्ट्रीयता का वेरिफिकेशन किए बिना उसे डिपोर्ट नहीं किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में राजूबाला दास की ओर से दायर एक लंबित याचिका में हलफनामा दाखिल कर ये बातें कही।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि किसी विदेशी नागरिक को संबंधित राज्य, केंद्रशासित प्रदेश या फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) ही सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद डिपोर्ट कर सकते हैं। किसी विदेशी नागरिक के गिरफ्तार होने की स्थिति में संबंधित राज्य, केंद्रशासित प्रदेश या एफआरआरओ विदेश मंत्रालय से संपर्क कर उसका ब्यौरा देते हैं। किसी विदेशी नागरिक को तब डिपोर्ट किया जाता है जब किसी कोर्ट का आदेश हो या उसके पास वैध यात्रा दस्तावेज या पासपोर्ट हो और उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज न हो। हालांकि अगर किसी विदेशी नागरिक के पास वैध यात्रा दस्तावेज नहीं हो तो संबंधित देश के उच्चायोग से उसकी नागरिकता का वेरिफिकेशन कराना जरूरी होता है। डिपोर्ट करना संबंधित देश के सहयोग पर निर्भर करता है।
उच्चतम न्यायालय ने साल 2025 में केंद्र और असम सरकार की ओर से विदेशी घोषित किए जा चुके लोगों को डिपोर्ट करने में हो रही देरी पर सवाल उठाया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक डिटेंशन सेंटर में नहीं रखा जा सकता है।