01 Jul 2026
नई दिल्ली, 01 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। तमिलनाडु सरकार ने राज्य में गोवध पर पूर्ण रोक लगाने के मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि उच्च न्यायालय का आदेश तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला है। याचिका में कहा गया है कि तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट में 10 साल से ज्यादा की उम्र की उन गायों का वध करने का प्रावधान है, जो काम करने या प्रजनन करने लायक नहीं हैं। याचिका में कहा गया है कि तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट के अलावा प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स एक्ट, प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स (स्लॉटर हाउस) रुल्स, तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज एक्ट और तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज रुल्स के प्रावधानों के मुताबिक भी पशुओं का वध करने की शर्तें तय की गई हैं लेकिन उनका वध करने पर पूर्ण रोक नहीं है। लेकिन उच्च न्यायालय ने गोवध पर पूर्ण रोक लगाकर इन प्रावधानों का उल्लंघन किया है। मद्रास उच्च न्यायालय ने 27 मई को गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता और हिन्दू मक्कल काची के महासचिव के सूर्या प्रशांत ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके वध तय जगह पर करने के दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने गाय या बछड़े के वध पर कभी और और कहीं भी करने पर पूर्ण रोक लगा दी थी।