20 Jul 2026
नई दिल्ली, 20 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी 84 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ी है। यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत समुद्री कच्चे तेल के व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
पिछले सप्ताह की तुलना में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में 15 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व की स्थिति और बिगड़ती है या आपूर्ति बाधित होती है, तो ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर की ओर भी बढ़ सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लगातार ऊंची रहने पर तेल विपणन कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। यदि यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। साथ ही महंगाई और परिवहन लागत में भी इजाफा होने की आशंका है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों की नजर मध्य पूर्व की स्थिति और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति की सामान्य स्थिति पर बनी हुई है। यदि तनाव कम नहीं हुआ तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।