24 Jul 2026
नई दिल्ली, 24 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूूज)। उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई करने की सलाह दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने जांच एजेंसियों को लंबित जांच जल्द से जल्द पूरी करने और पीड़ितों को चार्जशीट की प्रति एक हफ्ते में उपलब्ध कराने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस मामले पर ताजा स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कई पीड़ितों और उनके परिजनों को सीबीआई और एसआईटी की ओर से दाखिल चार्जशीट की प्रतियां नहीं मिली हैं। उसके बाद कोर्ट ने पीड़ितों की ओर से पेश राज्य विधिक सहायता प्राधिकार के वकीलों को चार्जशीट की प्रतियां हासिल करने के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय और मणिपुर उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस के कार्यालयों से संपर्क करने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने जांच एजेंसियों से कहा कि वे पीड़ितों को एक हफ्ते के अंदर चार्जशीट की प्रति उपलब्ध कराएं।
उच्चतम न्यायालय ने जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता में बनी कमेटी पीड़ितों के पुनर्वास और उनके कल्याण के लिए बनाई थी। इस कमेटी में जस्टिस गीता मित्तल के अलावा जस्टिस शालिनी जोशी और जस्टिस आशा मेनन को शामिल किया था। कोर्ट ने सीबीआई जांच की निगरानी के लिए पूर्व आईपीएस अधिकारी दत्तात्रेय पद्सालगिकर को नियुक्त किया था। मणिपुर में मई, 2023 में शुरु हुई हिंसा में अब तक दो सौ से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। इस हिंसा में हजारों लोग बेघर हुए और कई घायल हो गए। यह हिंसा तब भड़की जब मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था।