23 Jul 2026
नई दिल्ली, 23 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को NEET-UG पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया। संसद भवन परिसर के मकर द्वार पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों ने भी कांग्रेस के विरोध में जवाबी प्रदर्शन किया। दोनों पक्षों के सांसद आमने-सामने आ गए, जिसके चलते कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई। सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप कर बीचबचाव किया।
विपक्ष के प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजीव रंजन 'पप्पू यादव', धर्मेंद्र यादव और रामगोपाल यादव सहित इंडिया गठबंधन के कई सांसद शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने हाथों में बड़े-बड़े पोस्टर लिए हुए थे, जिन पर "लोकतंत्र मर रहा है" जैसे नारे लिखे थे। साथ ही उन्होंने "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" के नारे भी लगाए। विपक्ष का आरोप है कि NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पूरी तरह विफल रहे हैं तथा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ है।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि विपक्ष देश के युवाओं के अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए एकजुट होकर लड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपनी छवि बचाने के लिए झूठ और धमकियों का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी प्रमुख मांगों से पीछे नहीं हटेगा और इसकी शुरुआत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से होनी चाहिए।
वहीं, सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि विपक्ष का आंदोलन केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सड़क पर भी जारी रहेगा। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा।
एनडीए का पलटवार
विपक्ष के प्रदर्शन के जवाब में एनडीए सांसदों ने भी संसद परिसर में कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के निकट कांग्रेस द्वारा किए गए धरने के विरोध में आयोजित किया गया।
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने के बजाय केवल हंगामा करने की राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बैनर और पोस्टर लेकर सदन का समय बर्बाद करती है और गंभीर मुद्दों पर चर्चा से बचती है।
संबित पात्रा ने कहा कि भाजपा नेतृत्व ने हाल के दिनों में छात्रों तथा सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित विभिन्न पक्षों से बातचीत की है। उनके अनुसार इस चर्चा में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक कठोर कानून तथा प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता पर सहमति बनी है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन का निर्णय लिया है ताकि दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि केंद्र सरकार छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि छात्रों के भविष्य से बड़ा कोई मुद्दा नहीं है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
संसद के भीतर भी हंगामा
संसद के भीतर भी NEET पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि NEET पेपर लीक मामले पर विस्तृत चर्चा कराई जाए, जिम्मेदारी तय की जाए और शिक्षा मंत्री नैतिक आधार पर इस्तीफा दें। वहीं सरकार का कहना है कि मामले की जांच चल रही है, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानूनी एवं संस्थागत उपाय किए जा रहे हैं।
पेपर लीक मामला क्यों बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का विषय बन गया। लाखों अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है और कई राज्यों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं। विपक्ष सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल, मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी इस मुद्दे पर संसद में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव जारी रहने के आसार हैं। विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और विस्तृत चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार जांच पूरी होने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिला रही है। ऐसे में NEET पेपर लीक का मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक आने वाले दिनों में भी देश की राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।