01 Jul 2026
जयपुर, 01 जुलाई (एजेंसी)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने आवारा कुत्तों से जुडे मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए प्रकरण में स्वप्रेरणा से प्रकरण को जनहित याचिका के तौर पर दर्ज किया है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्रदेश से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए अभी तक क्या कार्रवाई की है। वहीं अदालत ने केन्द्र राज्य सरकार व भारतीय पशु कल्याण बोर्ड से जवाब देने के लिए कहा है। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा व जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दिए। खंडपीठ ने कहा कि कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। ये घटनाएं बच्चों और बुजुर्गों की जान के लिए खतरा बन सकती हैं। इसलिए राज्य अधिकारी और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नगर निगम और पशु चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर ऐसी स्थितियों से निपटने के तरीकों के बारे में लोगों को जागरूक करने और निगरानी रखने के लिए कदम उठाए। इसके लिए एनजीओ को भी प्रोत्साहित करना चाहिए। अदालत ने आगामी सुनवाई 3 अगस्त को तय की है। खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे इंसानों की जान के लिए खतरा बन सकने वाले कुत्तों सहित सभी पालतू जानवरों का उचित पंजीकरण सुनिश्चित करें और इसके लिए एक समय-सीमा तय की जाए। वहीं पंजीकरण न कराने पर जुर्माने जैसे दंड का प्रावधान भी करें। अदालत ने राज्य सरकार को कहा कि वे मामले में स्थानीय नगर निकायों की ओर से की गई कार्रवाई की एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करेंगे। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों की पालना में हो, जिसमें आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश दिए गए थे। इसके अलावा केन्द्र व भारतीय पशु कल्याण बोर्ड से कहा है कि वे एक हलफनामा पेश कर बताए कि उन्होंने जिला स्तर पर पशु कल्याण बोर्ड स्थापित करने और कुत्ते के काटने से बचाव के लिए एसओपी बनाने के लिए क्या कदम उठाए। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक सडक़ों और उनके आसपास से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए एक अलग विंग बनाई जाए। इसके साथ ही पकड़े गए कुत्तों का पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के अनुसार नसबंदी और टीकाकरण किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी पूछा है कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, डिस्पेंसरियों और अस्पतालों में पर्याप्त एंटी-रेबीज टीके उपलब्ध कराने के लिए क्या कार्रवाई की गई है।