28 Jul 2026
सीवान, 28 जुलाई (एजेंसी)। नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तथा जंतर-मंतर और पटना में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में 25 जुलाई को बुलाए गए बिहार बंद के दौरान सीवान में घटी एक घटना ने शहर की पुरानी यादों को फिर ताजा कर दिया। उग्र प्रदर्शनकारियों ने बबुनिया मोड़ स्थित भाजपा के स्वागत द्वार को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष एवं वार्ड पार्षद अमित कुमार सिंह उर्फ सोनू सिंह के मकान पर लगे भाजपा के झंडे को हटाने का दबाव बनाया। परिजन द्वारा झंडा हटाने के बाद स्थिति शांत हुई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसके बाद उत्तर प्रदेश के एक राष्ट्रीय दल के नेता ने भी वीडियो साझा करते हुए लिखा, "अब उतर रहे हैं डर से बीजेपी के झंडे।" इसके बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। शहर के कई लोगों ने इस घटना के बाद 15 मई 1996 की घटना को याद किया, जब नगर थाना क्षेत्र की सब्जी मंडी में व्यवसायी ओंकारमल सरैया की दिनदहाड़े हत्या हुई थी.स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा है कि उन्होंने अपने मकान से भाजपा का झंडा हटाने से इनकार किया था, जिसके बाद उनकी दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2005 से पहले तक सीवान में कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापक चिंता रहती थी। उस दौर में तत्कालीन जिलाधिकारी सी.के. अनिल और पुलिस अधीक्षक रत्न संजय द्वारा अपराध नियंत्रण के लिए कई अभियान चलाए गए। बाद में एनडीए सरकार बनने के बाद लोगों ने राहत महसूस की। 25 जुलाई की घटना के बाद एक बार फिर शहर में राजनीतिक सहिष्णुता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।
कई लोगों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति पर किसी राजनीतिक दल का झंडा लगाने या हटाने के लिए दबाव बनाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और ऐसे मामलों में कानून का समान रूप से पालन होना चाहिए। 25 जुलाई को सीवान की सड़कों पर प्रशासन का नेतृत्व सीधे मैदान में दिखाई दिया।
जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय और पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा स्वयं मोर्चे पर डटे रहे। पथराव में एसपी सहित कई पुलिस अधिकारी व जवान लहूलुहान हुए, लेकिन उन्होंने पीछे हटने के बजाय अभियान का नेतृत्व जारी रखा। प्रशासन की त्वरित और सख्त कार्रवाई से उपद्रव पर काबू पाया गया और शहर में कानून-व्यवस्था बहाल हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते उठाए गए इन कदमों ने हालात को और अधिक गंभीर होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।