09 Jul 2026
कोलकाता, 09 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के कालीघाट गुट के तीन फ्रीज किए गए बैंक खातों से जुड़े मामले में गुरुवार को अंतरिम राहत देते हुए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया है। अदालत ने निर्देश दिया कि फिलहाल इन खातों का संचालन विशेष अधिकारी करेंगे। साथ ही, पार्टी को दैनिक आवश्यक कार्यों और कानूनी खर्चों के लिए इन खातों से धनराशि उपयोग करने की अनुमति दी गई है, लेकिन यह प्रक्रिया विशेष अधिकारी की निगरानी में होगी।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुभ्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया। अदालत के अंतरिम आदेश के अनुसार, 30 सितंबर तक वही तीनों बैंक खातों का संचालन करेंगे। पार्टी यदि किसी आवश्यक खर्च के लिए धन निकालना चाहती है तो उसे विशेष अधिकारी के माध्यम से ही ऐसा करना होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि विशेष अधिकारी पार्टी के नियमित प्रशासनिक कार्यों और कानूनी खर्चों के लिए आवश्यक राशि जारी कर सकते हैं, लेकिन किसी बड़े या असामान्य वित्तीय व्यय की अनुमति नहीं होगी। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित की गई है।
यह विवाद तृणमूल कांग्रेस में चुनावी पराजय के बाद उभरे आंतरिक गुटीय संघर्ष के बीच सामने आया है। कालीघाट और ऋतब्रत गुट दोनों स्वयं को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं। इस संबंध में दोनों पक्षों के दावों पर निर्वाचन आयोग विचार कर रहा है।
मामले की शुरुआत 18 जून को हुई थी, जब दक्षिण 24 परगना के एक विधायक ने बिधाननगर साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बड़े साइबर ठगी गिरोह से जुड़ी धनराशि कुछ बैंक खातों में जमा हुई है, जिनमें तृणमूल कांग्रेस के कुछ खाते भी शामिल हो सकते हैं। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर संबंधित खातों से निकासी पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। इसी कार्रवाई को कालीघाट गुट ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कालीघाट गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि बैंक खाते फ्रीज होने से राजनीतिक पार्टी का दैनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में समान अवसर का सिद्धांत भी प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी वित्तीय लेनदेन निर्वाचन आयोग और आयकर विभाग की निगरानी में होते हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने पूछा कि यदि किसी संपत्ति पर संदेह हो तो क्या बैंक खाते भी जब्त की जाने वाली संपत्ति की श्रेणी में नहीं आते। इस पर सिंघवी ने कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए पहले विश्वसनीय और ठोस आधार होना आवश्यक है तथा पुलिस ने अस्पष्ट शिकायत के आधार पर कदम उठाया है।
राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ही कई लोगों के बयान दर्ज किए गए थे और पर्याप्त सामग्री के आधार पर ही कार्रवाई की गई। हालांकि अदालत ने यह भी पूछा कि बैंक खातों से निकासी पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई के समर्थन में प्रासंगिक साक्ष्य क्या हैं।
अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल विद्रोही गुट का इन खातों पर कोई स्थापित अधिकार नहीं है। न्यायालय ने कहा कि यदि भविष्य में निर्वाचन आयोग किसी गुट को अंतिम मान्यता देता है तो परिस्थितियों के अनुसार आदेश में संशोधन का अनुरोध किया जा सकता है। तब तक खातों से केवल आवश्यक और नियमित खर्च ही किए जा सकेंगे।