28 Jul 2026
नई दिल्ली, 28 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें मांग की गई थी कि कोर्ट के आदेश पर हो रही पुलिस जांच को दिल्ली पुलिस के एडिशनल डीसीपी (उत्तर-पूर्व) संदीप लांबा की निगरानी से हटाकर किसी और को सौंप दिया जाए।
संदीप लांबा तब विवादों में आ गए थे जब जंतर-मंतर पर हालिया विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला को थप्पड़ मारते हुए उनका वीडियो वायरल हुआ था। जस्टिस गिरीश कथपलिया की बेंच ने याचिका खारिज करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर किसी अधिकारी ने गलती की है तो कानून के मुताबिक उसके खिलाफ कार्रवाई होगी लेकिन कोर्ट बिना किसी निष्पक्ष ट्रायल के उसे कैसे दोषी मान सकती है और उससे कोई काम छीन सकती है। सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि लांबा ने एक महिला को थप्पड़ मारा, ऐसे में वो निष्पक्ष कैसे हो सकते हैं क्योंकि याचिकाकर्ता खुद पुलिस ज्यादती का शिकार है। तब कोर्ट ने कहा कि पूरा पुलिस बल ही कटघरे में खड़ा है तो क्या उन्हें एफआईआर दर्ज करना बंद कर देना चाहिए।
याचिकाकर्ता जरनिगार फातिमा ने उच्च न्यायालय में पहले एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि 24-25 मार्च 2025 की दरम्यानी रात को उसे जाफराबाद पुलिस थाने में गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया था। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस को जांच करने का आदेश दिया गया था। इसकी जांच संदीप लांबा की निगरानी में की जा रही है।
याचिकाकर्ता ने कहा था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान संदीप लांबा का महिला को थप्पड़ मारते हुए वीडियो वायरल हुआ था। ऐसे में संदीप लांबा की निगरानी में निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।