25 Jun 2026
काराकस, 25 जून (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। महज 39 सेकंड। इतना ही समय लगा दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला को आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में धकेलने के लिए। बुधवार शाम पहले 7.2 और फिर 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने देश को इस तरह झकझोरा कि राजधानी कराकास समेत कई शहरों में बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। सड़कों पर धूल का गुबार छा गया, लोग जान बचाने के लिए घरों और दफ्तरों से बाहर भागे और कुछ ही मिनटों में पूरा देश आपदा क्षेत्र में बदल गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 164 लोगों की मौत और 971 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। हालांकि राहत एजेंसियों को आशंका है कि यह संख्या काफी बढ़ सकती है क्योंकि दर्जनों इमारतों के मलबे में अभी भी लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 1900 के बाद वेनेजुएला का सबसे शक्तिशाली भूकंप बताया है और चेतावनी दी है कि वास्तविक जनहानि शुरुआती अनुमानों से कहीं अधिक हो सकती है।
भूकंप का केंद्र कैरेबियाई तट के पास मोरोन क्षेत्र में था, लेकिन सबसे ज्यादा तबाही राजधानी कराकास और ला गुआइरा में देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बंद कर दिया गया है, मेट्रो और रेल सेवाएं ठप हैं और हजारों लोग रात खुले आसमान के नीचे बिताने को मजबूर हैं। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने पूरे देश में आपातकाल घोषित करते हुए सेना, राहत एजेंसियों और स्वास्थ्य सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा है। भारत, अमेरिका, फ्रांस, स्पेन और कई लैटिन अमेरिकी देशों ने राहत सहायता भेजने की पेशकश की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक भूकंप नहीं, बल्कि पहले से आर्थिक और मानवीय संकट से जूझ रहे वेनेजुएला के लिए नई राष्ट्रीय त्रासदी बन सकता है।