20 Jun 2026
प्रयागराज, 20 जून (एजेंसी)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बिजनौर जिले के शेरकोट थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले में याची मुहम्मद गाजी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही अदालत ने विवेचना अधिकारी को मामले की जांच 60 दिनों के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने दिया है। याचिका में 27 अप्रैल 2026 को दर्ज एफआईआर को निरस्त किए जाने की मांग की गई थी। यह एफआईआर केस क्राइम संख्या 742026 के रूप में थाना शेरकोट, जनपद बिजनौर में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(1), 352, 351(2) और 109(1) के तहत दर्ज की गई थी। बताया गया कि मामले की विवेचना अभी पुलिस द्वारा की जा रही है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद खंडपीठ ने पूर्व में दिए गए एक निर्णय शोभित नेहरा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के संदर्भ में मामले का निस्तारण कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवेचना अधिकारी 60 दिनों के भीतर जांच पूरी करेगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि विवेचना की अवधि के दौरान तथा पुलिस रिपोर्ट पर सम्बंधित अदालत द्वारा संज्ञान लिए जाने तक याची मुहम्मद गाजी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। हालांकि अदालत ने यह शर्त भी लगाई है कि वह पूरा सहयोग करेगा। यदि वह पुलिस जांच में सहयोग नहीं करता है, तो अदालत में आदेश वापस लेने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।