29 Jun 2026
-बिहार के छोटे से गांव से निकलकर कान्स फिल्म फेस्टिवल तक पहुंचे प्रवीण सिंह सिसोदिया
- कांस फ़िल्म फेस्टिवल में हुआ “सितंबर 21” का प्रीमियर
अमित कुमार|इंद्रप्रस्थ न्यूज
“अगर हौसला बुलंद हो तो मंजिल कितनी भी दूर क्यों न हो, एक दिन कदमों में होती है।” इस कहावत को सच साबित किया है बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर मुंबई की मायानगरी और वहां से विश्व के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में शुमार कान्स फिल्म फेस्टिवल तक पहुंचने वाले अभिनेता प्रवीण सिंह सिसोदिया ने।
प्रवीण की फिल्म “सितंबर 21” का वर्ल्ड प्रीमियर कान्स फिल्म फेस्टिवल के पैलेस थिएटर में हुआ। यह उपलब्धि केवल एक कलाकार की सफलता नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
फिल्मी दुनिया में जगह बनाना आसान नहीं होता। यहां प्रतिभा के साथ-साथ धैर्य, संघर्ष और लगातार मेहनत की भी आवश्यकता होती है। जिन लोगों का फिल्म उद्योग से कोई पारिवारिक या सामाजिक संबंध नहीं होता, उनके लिए यह सफर और भी कठिन हो जाता है। प्रवीण सिंह सिसोदिया का सफर भी कुछ ऐसा ही रहा।
बिहार में रंगमंच की प्रसिद्ध संस्था “कला संगम” से अभिनय की शुरुआत करने वाले प्रवीण ने अपने गुरु और वरिष्ठ रंगकर्मी सतीश आनंद के निर्देशन में अभिनय की बारीकियां सीखीं। बिदेसिया शैली को नई पहचान दिलाने वाले सतीश आनंद के सान्निध्य में प्रवीण ने वर्षों तक रंगमंच किया और अभिनय को केवल पेशा नहीं बल्कि साधना की तरह अपनाया।
पटना में अनेक नाटकों में अभिनय करने के बाद वर्ष 1995 में उन्होंने बड़े सपनों के साथ मुंबई का रुख किया। संघर्ष लंबा था, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी। धीरे-धीरे उन्हें अवसर मिलने लगे और फिल्म “पीपली लाइव” में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका ने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
प्रवीण ने “रेड”, “इंडियाज मोस्ट वांटेड” जैसी चर्चित फिल्मों में काम किया। इसके अलावा रणदीप हुड्डा के साथ उनकी ओटीटी सीरीज “इंस्पेक्टर अविनाश” को भी दर्शकों ने खूब सराहा। उनके अभिनय की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने कभी जल्दबाजी में फैसले नहीं लिए और हमेशा चुनौतीपूर्ण तथा सार्थक भूमिकाओं को प्राथमिकता दी।
प्रवीण सिंह सिसोदिया ने अपने फिल्मी करियर में “पीपली लाइव”, “गैंग्स ऑफ वासेपुर”, “बिन बुलाए बाराती”, “फगली”, “हाफ गर्लफ्रेंड”, “रेड”, “इंडियाज मोस्ट वांटेड”, “सुपर 30” और “दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी” जैसी फिल्मों में उल्लेखनीय भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने हर किरदार में अपनी अभिनय क्षमता का ऐसा परिचय दिया कि दर्शकों और फिल्म समीक्षकों ने उनके काम को सराहा।
फिल्मों के अलावा रणदीप हुड्डा के साथ उनकी चर्चित ओटीटी सीरीज “इंस्पेक्टर अविनाश” ने भी उन्हें नई पहचान दिलाई। उनके अभिनय की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने कभी जल्दबाजी में फैसले नहीं लिए और हमेशा चुनौतीपूर्ण तथा सार्थक भूमिकाओं को प्राथमिकता दी।
इसी दौरान फिल्म “सितंबर 21” का निर्माण हुआ, जिसने उन्हें कान्स फिल्म फेस्टिवल तक पहुंचा दिया। यह फिल्म अल्जाइमर जैसी गंभीर और संवेदनशील बीमारी पर आधारित है। कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है जो धीरे-धीरे अपनी यादों और रिश्तों से दूर होता जा रहा है। इस किरदार को प्रवीण सिंह सिसोदिया ने बेहद ईमानदारी, संवेदनशीलता और गहराई के साथ निभाया है।
निर्देशक करेन क्षिति सुवर्णा की यह फिल्म इंसानी रिश्तों की जटिलताओं, बदलते समय और यादों के धुंधलके में खोते अपनों के दर्द को बड़ी सादगी और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। यह कोई पारंपरिक व्यावसायिक फिल्म नहीं है, बल्कि एक ऐसी संवेदनशील सिनेमाई प्रस्तुति है जो दर्शकों को भीतर तक झकझोर देती है।
आज जब सिनेमा में तेज रफ्तार घटनाएं, बड़े-बड़े एक्शन दृश्य और मसालेदार कथानक हावी हैं, ऐसे समय में “सितंबर 21” जैसी फिल्म अपने शांत क्षणों, गहरी भावनाओं और मानवीय दृष्टिकोण के कारण अलग पहचान बनाती है। यही वजह है कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है।
फिल्म में प्रवीण सिंह सिसोदिया के साथ प्रियंका उपेंद्र, जरीना वहाब, अमित बहल और रिंकी जैसे अनुभवी कलाकारों ने भी प्रभावशाली अभिनय किया है।
प्रवीण सिंह सिसोदिया की यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह साबित करती है कि प्रतिभा और मेहनत किसी परिचय या सिफारिश की मोहताज नहीं होती। बिहार के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ उनका सफर आज कान्स फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट तक पहुंच चुका है। यह कहानी उन सभी सपने देखने वालों के लिए एक संदेश है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदार, तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं होती।