08 Jul 2026
पश्चिम बर्दवान, 08 जुलाई (एजेंसी.)। पश्चिम बंगाल के आसनसोल स्थित बर्नपुर का ऐतिहासिक सिनेमा हॉल अब इतिहास का हिस्सा बन गया है। लगभग छह से सात दशक तक औद्योगिक शहर के सांस्कृतिक जीवन की धड़कन रहे इस प्रतिष्ठित सिंगल-स्क्रीन थिएटर को जुलाई 2026 में आईआईएससीओ-सेल प्रबंधन ने ध्वस्त कर दिया। अब इस स्थान पर कंपनी की टाउनशिप पुनर्विकास योजना के तहत नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारियों के लिए करीब 126 आवासीय फ्लैट बनाए जाएंगे।
बर्नपुर का विकास वर्ष 1918 में इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी (आईआईएससीओ) की स्थापना के साथ शुरू हुआ। स्टील प्लांट के विस्तार के साथ कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए अस्पताल, स्कूल, क्लब, पार्क और मनोरंजन की सुविधाएं विकसित की गईं। इन्हीं सुविधाओं के तहत 1958 से 1962 के बीच बर्नपुर सिनेमा हॉल का निर्माण किए जाने की बात स्थानीय इतिहास और पुराने कर्मचारियों के अनुभवों से सामने आती है। हालांकि इसके निर्माण वर्ष का कोई आधिकारिक सार्वजनिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
यह सिनेमा हॉल आईआईएससीओ टाउनशिप के सांस्कृतिक जीवन का प्रमुख केंद्र बन गया था। यहां हिंदी, बांग्ला और अंग्रेजी फिल्मों का नियमित प्रदर्शन होता था। आईआईएससीओ कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए विशेष शो भी आयोजित किए जाते थे। नई फिल्मों की रिलीज पर टिकट खिड़की के बाहर लंबी कतारें लगती थीं और दुर्गा पूजा, काली पूजा सहित अन्य त्योहारों के दौरान हाउसफुल बोर्ड लगना आम बात थी।
1970, 1980 और 1990 के दशक को बर्नपुर सिनेमा हॉल का स्वर्णिम काल माना जाता है। उस दौर में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, राजेश खन्ना, उत्तम कुमार और सौमित्र चटर्जी जैसे सितारों की फिल्मों के शो दर्शकों से खचाखच भरे रहते थे। बर्नपुर के अलावा आसनसोल, कुल्टी, रानीगंज, चित्तरंजन और आसपास के इलाकों के लोग भी यहां फिल्में देखने पहुंचते थे।
समय के साथ केबल टीवी, डीवीडी, मल्टीप्लेक्स और बाद में ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव से सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघरों का कारोबार प्रभावित होने लगा। आईआईएससीओ के पुनर्गठन और टाउनशिप की बदलती जीवनशैली का असर भी इस सिनेमा हॉल पर पड़ा। दर्शकों की संख्या लगातार घटती गई और अंततः इसका संचालन बंद हो गया। इसकी अंतिम प्रदर्शित फिल्म को लेकर कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
कई वर्षों तक यह इमारत वीरान खड़ी रही। जुलाई 2026 में आईआईएससीओ-सेल प्रबंधन ने इसे ध्वस्त कर दिया। प्रबंधन के अनुसार, कंपनी की पुनर्विकास योजना के तहत यहां नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारियों के लिए लगभग 126 आधुनिक आवासीय फ्लैटों का निर्माण किया जाएगा।
सिनेमा हॉल के ध्वस्तीकरण से स्थानीय लोगों में भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। बुजुर्गों और पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि यह केवल एक इमारत नहीं थी, बल्कि उनकी पीढ़ियों की यादों, पारिवारिक पलों और बर्नपुर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक थी।
आज जहां कभी फिल्मी गीतों की गूंज, तालियों की आवाज और दर्शकों की भीड़ हुआ करती थी, वहां नए निर्माण की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।