24 Jul 2026
नई दिल्ली, 24 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन के प्रस्ताव को शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी। सरकार अब संशोधन विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में सोमवार को पेश कर पारित कराने की तैयारी में है।
संशोधन का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, संगठित नकल, डिजिटल माध्यमों से होने वाली धोखाधड़ी और परीक्षा प्रक्रिया में नई प्रकार की अनियमितताओं पर अधिक प्रभावी अंकुश लगाना बताया जा रहा है। सरकार का कहना है कि बदलती तकनीक और परीक्षा संबंधी अपराधों के नए स्वरूप को देखते हुए कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।
इससे पहले गुरुवार रात प्रधानमंत्री ने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रस्तावित संशोधनों की आवश्यकता और सरकार के दृष्टिकोण की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि युवाओं की मेहनत और ईमानदार अभ्यर्थियों के भविष्य की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार संशोधन विधेयक में जांच एजेंसियों की शक्तियों, संगठित परीक्षा माफिया के खिलाफ कार्रवाई, डिजिटल अपराधों से निपटने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों को और सुदृढ़ किए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि, संशोधन के विस्तृत प्रावधान विधेयक संसद में पेश होने के बाद ही सार्वजनिक होंगे।
दरअसल, देशभर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं के कई मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के बाद केंद्र सरकार पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लेकर आई थी, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल, प्रश्नपत्र लीक और संगठित परीक्षा अपराधों पर रोक लगाना है।
इस कानून के तहत प्रश्नपत्र लीक, उत्तर पुस्तिका से छेड़छाड़, कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं में हैकिंग तथा संगठित परीक्षा धोखाधड़ी जैसे अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। अधिनियम में दोषी पाए जाने पर कारावास, भारी जुर्माना और संगठित अपराधों में शामिल गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
सरकार का कहना है कि नए संशोधन से कानून को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत हो सके। वहीं, संशोधन विधेयक पर संसद में चर्चा के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों की राय भी सामने आने की संभावना है।