21 Jun 2026
-‘रंग संस्कार’ बाल रंग महोत्सव में नन्हें कलाकारों का शानदार प्रदर्शन
-आरएसएस संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन पर आधारित नाटक रहा प्रमुख आकर्षण
-महोत्सव में पांच नाटक एवं एक एकल अभिनय की प्रस्तुति
नई दिल्ली, 21 जून ( इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उड़ान – द सेंटर ऑफ थिएटर आर्ट एंड चाइल्ड डेवलपमेंट द्वारा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), संस्कृति मंत्रालय की साझीदारी में आयोजित ‘रंग संस्कार’ बाल रंग महोत्सव में नन्हें कलाकारों ने अपनी अभिनय प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया। महोत्सव में देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और पारिवारिक मूल्यों जैसे विषयों पर आधारित पांच नाटकों एवं एक एकल अभिनय की प्रस्तुति दी गई।
आईजीएनसीए के समवेत सभागार में आयोजित इस महोत्सव का शुभारंभ प्रख्यात रंगकर्मी, लेखिका एवं साहित्यकार मालविका जोशी तथा कलादर्शन विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा कंबोज ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का आयोजन उड़ान के निदेशक संजय टुटेजा के मार्गदर्शन एवं संयोजन में किया गया।
इस अवसर पर संजय टुटेजा ने बाल रंगमंच कक्षाओं की गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि रंगमंच बच्चों के व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम है। यह बच्चों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति क्षमता, नेतृत्व कौशल, रचनात्मक सोच और सामाजिक संवेदनशीलता का विकास करता है। उन्होंने बताया कि पिछले एक माह से विभिन्न स्थानों पर आयोजित बाल रंगमंच कार्यशालाओं में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले बच्चों ने इस महोत्सव में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण ‘वत्सले मातृभूमे’ नाटक रहा, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन पर आधारित था। रंगकर्मी योगेश पंवार के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों ने प्रभावशाली अभिनय कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
इसके अतिरिक्त अभिषेक राणा के निर्देशन में प्रस्तुत ‘ताजमहल का टेंडर’ और ‘बाप रे बाप’, हिमांशी के निर्देशन में मंचित ‘आजादी की कहानी’ तथा ‘जंगल की पुकार’ ने दर्शकों को सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर सोचने के लिए प्रेरित किया। वहीं भाव बंसल द्वारा प्रस्तुत एकल अभिनय ‘बढ़ता स्कूल बैग’ ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और बच्चों पर बढ़ते शैक्षणिक बोझ को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।
महोत्सव के दौरान बच्चों ने अपने सशक्त अभिनय, संवाद अदायगी और मंचीय प्रस्तुति से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। प्रत्येक प्रस्तुति में बच्चों की मेहनत, समर्पण और प्रशिक्षण की झलक दिखाई दी।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी बच्चों, प्रशिक्षकों, स्वयंसेवकों एवं अभिभावकों को सम्मानित किया गया। आयोजकों ने भविष्य में भी बाल रंगमंच के माध्यम से बच्चों के व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक चेतना और रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को दोहराया।