01 Jul 2026
भुवनेश्वर, 01 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। ओडिशा विजिलेंस ने ग्रामीण विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कंधमाल जिले के कोटगढ़ ब्लॉक के सहायक अभियंता (एई) प्रशांत कुमार पात्र और कनिष्ठ अभियंता (जेई) प्रफुल्ल कुमार बेहरा को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में 42 लाख रुपये से अधिक के कथित गबन के आरोप में गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपितों को बुधवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। विजिलेंस जांच के अनुसार, दोनों अभियंताओं पर मनरेगा के तहत स्वीकृत विकास कार्यों के लिए जारी सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप है। यह कार्रवाई धाराकोट ग्राम पंचायत क्षेत्र में अमृत सरोवर (तालाब) परियोजना तथा अन्य विकास कार्यों के निष्पादन में वित्तीय अनियमितताओं की विस्तृत जांच के बाद की गई। प्रारंभिक जांच में वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच तीन वर्षों तक भ्रष्टाचार किए जाने के संकेत मिले हैं। मामले की जांच के दौरान संयुक्त भौतिक सत्यापन और तकनीकी निरीक्षण कराया गया, जिसमें सरकारी अभिलेखों और धरातल पर किए गए वास्तविक कार्यों के बीच भारी अंतर सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार, संबंधित परियोजनाओं के लिए 49,83,995 रुपये का भुगतान किया जा चुका था, जबकि तकनीकी मूल्यांकन में मौके पर केवल 7,42,357 रुपये मूल्य का कार्य ही निष्पादित पाया गया। जांच में खुलासा हुआ कि शेष 42 लाख रुपये से अधिक की राशि बिना कार्य कराए ही कथित रूप से गबन कर ली गई। विजिलेंस के अनुसार, मनरेगा के दिशा-निर्देशों के तहत किसी भी परियोजना के विभिन्न चरणों में डिजिटल जियो-टैग्ड फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। इसके बाद ही संबंधित कार्यों के बिल तैयार और भुगतान किए जा सकते हैं। हालांकि, इस मामले में किसी भी चरण पर जियो-टैग्ड फोटो न तो ली गईं और न ही पोर्टल पर अपलोड की गईं, जिससे फर्जी भुगतान का मामला उजागर हुआ। इस संबंध में ओडिशा विजिलेंस ने ब्रह्मपुर विजिलेंस थाना मामला संख्या 062026 दर्ज कर सभी आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। विजिलेंस ने संकेत दिया है कि मामले की जांच जारी है और जांच के दायरे में अन्य संबंधित अधिकारियों एवं व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।