27 Jun 2026
वाशिंगटन|तेहरान, 27 जून (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। बीती रात पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया। अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्षविराम (सीजफायर) अब गंभीर संकट में दिखाई दे रहा है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाया है। इसी बीच इजरायल-लेबनान सीमा पर भी हालात संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि ताजा रिपोर्टों के अनुसार इजरायल और लेबनान के बीच एक अमेरिकी मध्यस्थता वाला फ्रेमवर्क समझौता हुआ है लेकिन हिजबुल्लाह ने इसका विरोध किया है और जमीन पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
अमेरिका ने ईरान पर फिर किए हमलेः
अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक कारोबारी मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला किया, जो हालिया संघर्षविराम का उल्लंघन था। इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडार, रडार ठिकानों तथा सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
ईरान का पलटवार, अमेरिका पर लगाया आरोपः
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को "आक्रामक हमला" बताते हुए कहा कि अमेरिका ने ही सबसे पहले संघर्षविराम तोड़ा। तेहरान का दावा है कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी हमले जारी रहे तो जवाब और अधिक कड़ा होगा।
दोनों देशों के आरोप-प्रत्यारोपः
वॉशिंगटन का आरोप है कि ईरान ने ड्रोन हमले के जरिए सीजफायर का उल्लंघन किया, जबकि तेहरान का कहना है कि अमेरिकी हवाई हमले ही समझौते को तोड़ने वाले पहले कदम थे। इस वजह से दोनों देशों के बीच बना अस्थायी संघर्षविराम अब लगभग निष्प्रभावी होता दिखाई दे रहा है।
इजरायल-हिजबुल्लाह मोर्चे पर क्या हो रहा है?
उधर लेबनान मोर्चे पर भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है। अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान ने एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत हिजबुल्लाह को निरस्त्र करने और दक्षिणी लेबनान में लेबनानी सेना की भूमिका बढ़ाने का प्रस्ताव है। लेकिन हिजबुल्लाह इस समझौते का हिस्सा नहीं है और उसने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उसे जबरन निशाना बनाया गया तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं।
क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंकाः
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान टकराव दोबारा तेज होने से पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी पर असर पड़ने की आशंका है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, यदि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष फिर भड़कता है तो क्षेत्र में बहु-मोर्चीय संकट गहरा सकता है।
फिलहाल स्थिति यह है कि अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे को सीजफायर तोड़ने का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वहीं लेबनान में कूटनीतिक पहल के बावजूद हिजबुल्लाह की असहमति के कारण इजरायल सीमा पर तनाव बरकरार है। ऐसे में आने वाले 24 से 48 घंटे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।