06 Jul 2026
नई दिल्ली, 06 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। सर्च इंजन गूगल ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा है कि उसके लिए ये संभव नहीं है कि वो यूट्यूब पर कोर्ट की कार्यवाही के अनधिकृत रिकॉर्डिंग और उसके अपलोड या शेयर करने पर नजर रख सके।
गूगल ने ये हलफनामा एक वकील की ओर से दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के दूसरे नेताओं और पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच में हुई सुनवाई के वीडियो अपलोड करने पर कोई की अवमानना की कार्यवाही शुरु करने की मांग करने वाली याचिका के जवाब में दाखिल किया है।
गूगल ने कहा है कि किसी सोशल मीडिया को अनधिकृत रिकॉर्डिंग को दोबारा अपलोड करने से रोकना कानून सम्मत नहीं है, क्योंकि ऐसे आदेश का पालन होना लगभग असंभव है। गूगल ने कहा है कि ऐसे रिकॉर्डिंग यूट्यूब से बाहर किए जाते हैं और उसके लिए ये पता करना असंभव है कि वीडियो में कोर्ट की कार्यवाही है या नहीं। गूगल ने कहा है कि वो ये भी पता नहीं लगा पाएगी कि रिकॉर्डिंग अनधिकृत है या नहीं। गूगल ने कहा कि इस मसले पर देश भर की अदालतों ने अगल-अगल फैसले दिए हैं। गूगल ने कहा है कि वो उन्हीं वीडियो को हटा सकता है, जिनके यूआरएल या वेबलिंक बताए जाएं। बताए गए वीडियो के यूआरएल या वेबलिंक के अलावा करोड़ों वीडियो गूगल पर होते हैं, जिन्हें मानीटर करना असंभव है।
दरअसल, याचिका में दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में ट्रायल कोर्ट की ओर से केजरीवाल को बरी करने के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को हटाने की मांग की सुनवाई के वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने पर आपत्ति जताई गई है। याचिका में केजरीवाल और रवीश कुमार के अलावा कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, संजीव झा, पूरनदीप साहनी, जरनैल सिंह, मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई है।
याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाए जाएं। याचिका में केजरीवाल पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कोर्ट में बिना आधार के भ्रामक दलीलें दी। केजरीवाल ने कोर्ट का मान कम करने के लिए कई अनर्गल आरोप लगाए। याचिका में कहा गया है कि केजरीवाल की दलीलों को रिकॉर्ड कर उन्हें एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के विभिन्न चैनल्स पर अपलोड किया गया। ऐसा कर आम लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की गई। इसके जरिये कोर्ट और केंद्र सरकार पर अनावश्यक दबाव बनाने का प्रयास किया गया। इसके पहले याचिकाकर्ता वकील वैभव सिंह ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल से शिकायत कर केजरीवाल और दूसरे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी।