21 Jul 2026
नई दिल्ली, 21 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। राजधानी में मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च और उसके बाद हुए धरने के दौरान हिरासत में लिये गए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और पवन खेड़ा समेत विपक्ष के सभी प्रमुख नेताओं को देर शाम पुलिस ने रिहा कर दिया। इससे पहले दिनभर चले राजनीतिक घटनाक्रम ने दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक सियासी पारा बढ़ा दिया।
हिरासत में लिये जाने के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं को पुलिस अलग-अलग बसों से ले गई थी। राहुल गांधी और अखिलेश यादव के साथ कुछ नेताओं को छत्रसाल स्टेडियम और प्रियंका गांधी के साथ अन्य नेताओं को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया। देर शाम करीब दस बजे उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई।
मंदिर मार्ग थाने पहुंचीं सोनिया गांधी
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी हिरासत में लिये गए प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं से मिलने के लिए नई दिल्ली के मंदिर मार्ग थाने पहुंचीं। उनकी मौजूदगी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा और पार्टी ने इसे विपक्ष के साथ एकजुटता का संदेश बताया।
वार्ता के बावजूद नहीं टूटा गतिरोध
दिन में सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने दो बार राहुल गांधी से बातचीत की थी। डॉ. जितेंद्र सिंह का दावा है कि राहुल गांधी ने पहले संसद में NEET और उससे जुड़े आंदोलन पर चर्चा कराने की मांग रखी थी और सरकार ने इसे स्वीकार भी कर लिया था। बाद में राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी जोड़ दी, जिसके कारण सहमति नहीं बन सकी।
दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना है कि उसका आंदोलन केवल NEET तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के साथ हुए कथित अन्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का मुद्दा भी है।
अखिलेश की हिरासत के बाद यूपी में सपा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
दिल्ली में अखिलेश यादव को हिरासत में लिये जाने की खबर फैलते ही उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। राजधानी लखनऊ में राजभवन (गवर्नर हाउस) के बाहर सपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी की तस्वीर पर काली स्याही उड़ेल दी। नारेबाजी कर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिसके दौरान धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई।
इसी तरह वाराणसी, आगरा, गोरखपुर, चंदौली और बस्ती सहित कई अन्य जिलों में भी सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई तथा कुछ जगहों पर कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया। पुलिस ने प्रमुख सरकारी परिसरों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी।
अखिलेश ने कहा- पुलिस ने छात्रों के साथ बर्बरता की गई
उधर, दिल्ली में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट में यह लोग फेलियर हुए, यह अपना गुस्सा निकाल रहे हैं छात्रों पर। हमारी सरकार से मांग है कि छात्रों की मांग को स्वीकार करें और जो मंत्री है वह इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कल बड़ा अन्याय किया गया। लाठीचार्ज कर उन्हें पीटा गया, सिर फोड़े गए, हड्डियां तोड़ी गईं। यहां तक कि छात्राओं के कपड़े फाड़े गए। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ यह सलूक होना चाहिए। हम इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।
दिनभर का घटनाक्रम
दिल्ली में विपक्ष के प्रदर्शन और उसके बाद उत्तर प्रदेश में फैले विरोध ने इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। अब इस मामले को लेकर संसद के भीतर और बाहर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के आसार हैं।