22 Jul 2026
नई दिल्ली/लखनऊ/देहरादून/भोपाल, 22 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद मंगलवार देर रात उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में राजभवनों के बाहर प्रदर्शन हुए, जबकि कई जिलों में कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
सबसे तीखी प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश में देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में राजभवन के बाहर प्रदर्शन कर राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजने की मांग की। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर काली स्याही उड़ेल दी। वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, बस्ती समेत कई जिलों में भी सपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर पुलिस के साथ धक्का-मुक्की और हल्की झड़प की भी खबरें सामने आईं।
उत्तराखंड में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देहरादून स्थित राजभवन के बाहर प्रदर्शन कर विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी को लोकतंत्र पर हमला बताया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर बाद में छोड़ दिया।
मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भोपाल सहित कई जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किया। भोपाल में विधानसभा और राजभवन पर प्रदर्शन हुआ। भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, कटनी, खंडवा, हरदा, शाजापुर, टीकमगढ़, रतलाम, डबरा और खरगोन समेत कई जिलों में कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन, रैली और नारेबाजी की। कुछ जगह चक्काजाम और पुलिस से धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। छत्तीसगढ़ के कई शहरों में भी प्रदर्शन हुुए। उन्होंने राहुल गांधी और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
छात्रों के आंदोलन और परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर मंगलवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च किया। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मार्च को बीच रास्ते में रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेता धरने पर बैठ गए।
काफी देर तक चले गतिरोध के बाद पुलिस ने धरना समाप्त कराते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। मंगलवार रात करीब 10 बज सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद अखिलेश यादव का हमला
रिहा होने के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार पुलिस के सहारे लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और युवाओं के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।
कांग्रेस का आरोप, सरकार का जवाब
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के साथ बल प्रयोग किया गया और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार का हनन हुआ। वहीं सरकार और पुलिस का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास क्षेत्र की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव की गिरफ्तारी के विरोध में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के राजभवनों के बाहर हुए प्रदर्शनों के बाद अब यह मुद्दा दिल्ली से निकलकर कई राज्यों में राजनीतिक टकराव का कारण बन गया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार विपक्ष की मांगों पर विचार नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।