06 Aug 2026
नई दिल्ली, 6 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। संसद के मानसून सत्र का गुरुवार सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे टकराव का दिन रहा। छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर दान राशि के कथित गबन और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया। विपक्षी दल गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की मांग पर अड़े रहे, जबकि सरकार ने हंगामे के बीच भी अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ाते हुए कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया।
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। प्रश्नकाल और शून्यकाल बार-बार बाधित हुए। विपक्ष की ओर से छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की गई, जबकि सरकार ने सदन को सुचारु रूप से चलाने की अपील की। लगातार हंगामे के बीच अध्यक्ष ने कई बार सदन स्थगित किया।
व्यवधान के बावजूद लोकसभा ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक में कर संबंधी विभिन्न प्रावधानों में संशोधन किए गए हैं और डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े कुछ प्रावधानों का भी रास्ता साफ हुआ। इसके अलावा बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 भी पारित किया गया, जिससे 1891 के पुराने कानून की जगह डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को न्यायिक प्रक्रिया में अधिक प्रभावी मान्यता देने का प्रावधान किया गया है।
उधर, राज्यसभा में भी दिन की शुरुआत हंगामे के साथ हुई। विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर नारेबाजी की और सरकार से जवाब मांगा। सभापति की ओर से कई बार सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील की गई, लेकिन विरोध जारी रहा। इसके चलते सदन की कार्यवाही दोपहर तक कई बार स्थगित करनी पड़ी।
दोपहर बाद सदन में विधायी कार्य शुरू हुआ। सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित किया गया। इसके तहत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इससे लंबित मामलों के तेजी से निस्तारण में मदद मिलेगी।
इसके बाद राज्यसभा ने विनियोग (संख्या-3) विधेयक, 2026 भी पारित कर दिया। इस विधेयक के माध्यम से वर्ष 2022-23 के दौरान विभिन्न मदों में हुए 54,067 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त व्यय को वैधानिक स्वीकृति दी गई। यह धन मुख्य रूप से ऋण अदायगी सहित स्वीकृत व्यय को नियमित करने के लिए अधिकृत किया गया है।
संसद परिसर में भी राजनीतिक सरगर्मी पूरे दिन बनी रही। विपक्षी सांसदों ने परिसर में प्रदर्शन कर सरकार पर लोकतांत्रिक आवाज दबाने का आरोप लगाया। कांग्रेस, सपा और अन्य दलों के नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार संसद में जवाब देने से बच रही है। वहीं भाजपा और एनडीए नेताओं ने विपक्ष पर जानबूझकर संसद की कार्यवाही बाधित करने और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया।
दिनभर की घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि मानसून सत्र में राजनीतिक गतिरोध अभी खत्म होता नहीं दिख रहा है। विपक्ष अपने मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम है, जबकि सरकार हंगामे के बावजूद विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सत्र के आगामी दिनों में भी संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव जारी रहने के आसार हैं।