07 Aug 2026
सना (यमन), 07 अगस्त (एजेंसी)। यमन में हूती (अंसार अल्लाह) विद्रोहियों के गुरुवार को किए गए भीषण हमले में कम से कम 30 से 45 सैनिक मारे गए। हूती विद्रोहियों ने मारिब और हद्रमौत प्रांतों में सरकारी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागकर हमलों को अंजाम दिया। इन हमलों में घायल सैनिकों की संख्या 50 से ज्यादा बताई जा रही है। हूती ने हताहत सरकारी सैनिकों की संख्या सैकड़ों में बताई है। हूती यमन का चरमपंथी, राजनीतिक और सैन्य संगठन है। यह मुख्य रूप से यमन के उत्तरी हिस्से के जैदी शिया मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करता है। इसे ईरान का सीधा समर्थन प्राप्त है। अमेरिका, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात हूती को आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं।
यमन की न्यूज एजेंसी 'सबा' के एक्स हैंडल और अल जजीरा की वेबसाइट की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारी हताहत सैनिकों की संख्या 45 से अधिक बता रहे हैं। अप्रैल 2022 के युद्धविराम के बाद इसे यमन में सबसे घातक सैन्य तनाव माना जा रहा है। यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में हूती विद्रोहियों का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। कहा जा रहा है कि हूती विद्रोहियों ने सरकारी सेना के शिविरों पर ताबड़तोड़ आठ बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। इससे सैन्य शिविरों में हाहाकार मच गयाशुरुआती रिपोर्ट में कहा गया कि हूती के हमले में 30 सैनिक मारे गए। बाद में बताया गया कि जान गंवाने वाले सैनिकों की संख्या लगभग 38 है। यह संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हूती ने आधिकारिक रूप से इस हमले की जिम्मेदारी भी ली है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, हूती के हमले में घायल 50 से ज्यादा सैनिकों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कई घायलों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। हूती के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी का दावा है कि स्थानीय समयानुसार गुरुवार लगभग दो बजे किए गए उनके हमले में सैकड़ों सरकारी सैनिक मारे गए हैं। उनके हमले में यमन की सरकारी सेना के शिविरों, हथियार डिपो और वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
यमन की सरकारी सेना ने इन हमलों की पुष्टि की। सरकारी सैन्य सूत्रों के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने मारिब के उत्तर में स्थित अल-जौफ प्रांत से आठ मिसाइलें दागीं। इससे जानमाल की भारी क्षति हुई। हताहतों की संख्या बढ़ सकती है। हूती ने यमन की सरकारी होमलैंड शील्ड फोर्सेज, इमरजेंसी फोर्सेज और हदरमौत में फर्स्ट मिलिट्री रीजन के शिविरों को निशाना बनाया। होमलैंड शील्ड फोर्सेज का गठन 2022 में सऊदी अरब के सहयोग से किया गया था। यह फोर्स मारिब-हदरमौत सीमा और सऊदी सीमा की सुरक्षा करती है।
इस फोर्स ने इस साल की शुरुआत में सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल की सेनाओं के खिलाफ लड़ाई लड़ी। इमरजेंसी फोर्सेज का गठन 2025 के आखिर में राष्ट्रपति के आदेश और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन की देखरेख में किया गया था। ये फोर्स अल-जौफ और हद्रमौत में जमीनी सीमा की रक्षा करने के साथ हूती से सीधा मोर्चा लेती है।फर्स्ट इमरजेंसी डिवीजन कमांड ने बताया कि हताहतों की संख्या ज्यादा हो सकती है, क्योंकि सैनिक ट्रेनिंग एक्सरसाइज के लिए इकट्ठा हुए थे।
यमन में राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर डॉ. रशाद मोहम्मद अल-अलीमी के कार्यालय ने हमले की पुष्टि की है। कार्यालय के बयान में कहा गया है कि स्थिति पर चौबीस घंटे बारीकी से नजर रखी जा रही है। गठबंधन सेना के आधिकारिक प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने एक्स पर शहीद सैनिकों के परिवारों और रिश्तेदारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। इसके अलाा यमन में अमेरिकी दूतावास ने इन हमलों को कायरतापूर्ण बताया है। एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिकी मिशन ने हताहत यमनी सैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।।