07 Aug 2026
नई दिल्ली, 07 अगस्त (एजेंसी)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकार से पूछा है कि वह जंतर-मंतर इलाके को विरोध प्रदर्शन की जगह के तौर पर बंद करने पर विचार क्यों नहीं कर रही है। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने कहा कि शहर के बीचो बीच होने वाले ऐसे विरोध प्रदर्शनों की वजह से शहर को बेवजह बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने ये टिप्पणी ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिका में दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति मांगने वाली अर्जी पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय घोष ने कहा कि पुलिस ने न तो अनुरोध को खारिज किया है और न ही उसे मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि हम कह रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा 75 लोग आएंगे, लेकिन दिल्ली पुलिस जुलाई से याचिकाकर्ता की अर्जी पर कोई फैसला नहीं ले रही है। उन्होंने इसे खारिज भी नहीं किया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा से पूछा कि आप जंतर-मंतर को बंद क्यों नहीं करते हैं। मेरे हिसाब से शहर में ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह फैसला सरकार को करना है। शहर को बेवजह बंधक क्यों बनाया जाए। तब शर्मा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का भी ऐसा ही आदेश है।
उच्चतम न्यायालय भी एक याचिका पर विचार कर रहा है कि जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगह बनाया जा सकता है या नहीं। तब जस्टिस महाजन ने कहा कि मेरे हिसाब से ऐसा नहीं होना चाहिए। तब याचिकाकर्ता के वकील घोष ने पूछा कि क्या केंद्र का यह रुख है कि दिल्ली में कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हो सकता है। घोष ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने शाहीन बाग मामले में कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार है। तब जस्टिस महाजन ने कहा कि बिल्कुल, लेकिन शहर को बंधक तो न बनाएं।