08 Aug 2026
कोरबा, 08 अगस्त (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। देश में एल्युमिनियम की बढ़ती मांग के बीच वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) अपने विस्तार और आधुनिकीकरण के साथ उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा करने जा रही है। बालको में निर्माणाधीन नए स्मेल्टर प्लांट का करीब 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसके पूरा होने के बाद बालको की एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता बढ़कर 10 लाख टन प्रतिवर्ष हो जाएगी। इसके साथ ही वेदांता समूह की कुल एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता करीब 28.5 लाख टन प्रतिवर्ष पहुंच जाएगी और समूह दुनिया के चौथे सबसे बड़े एल्युमिनियम उत्पादकों में शामिल होगा।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश कुमार सिंह ने शनिवार काे बताया कि कंपनी लगातार निवेश और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है। निजीकरण के समय बालको की उत्पादन क्षमता करीब एक लाख टन प्रतिवर्ष थी, जिसे लगातार निवेश और आधुनिक तकनीक के उपयोग से बढ़ाकर करीब पांच लाख टन प्रतिवर्ष किया गया। अब नए स्मेल्टर के निर्माण के बाद यह क्षमता बढ़कर 10 लाख टन प्रतिवर्ष हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि बालको का विस्तार केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कोरबा को देश के प्रमुख एल्युमिनियम केंद्र के रूप में स्थापित करना है। नए स्मेल्टर में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक को अपनाने वाले देशों में भारत का महत्वपूर्ण स्थान है और इस तकनीक के आधार पर विकसित संयंत्र को लेकर कंपनी इसे तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही है। नए स्मेल्टर के शुरू होने से एल्युमिनियम उत्पादन में तेजी आने के साथ रोजगार और औद्योगिक निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
बालको संयंत्र के आसपास एल्युमिनियम पार्क विकसित करने की योजना भी बनाई गई है। इसके लिए संयंत्र से करीब दो से तीन किलोमीटर के दायरे में जमीन तलाशने की प्रक्रिया चल रही है। प्रस्तावित पार्क में लघु एवं मध्यम उद्योगों को सीधे हॉट मेटल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे एल्युमिनियम आधारित डाउनस्ट्रीम उद्योगों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा। परिवहन लागत कम होने के साथ एल्युमिनियम उत्पादों का स्थानीय स्तर पर निर्माण और वैल्यू एडिशन बढ़ेगा।
बालको प्रबंधन का मानना है कि औद्योगिक विकास के साथ स्थानीय समाज का विकास भी समान रूप से जरूरी है। वेदांता समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल के औद्योगिक विकास के साथ स्थानीय समाज के विकास के दृष्टिकोण के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार निवेश किया जा रहा है, ताकि औद्योगिक विकास का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच सके।
उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ बालको को ऊर्जा और कोयले की आवश्यकता भी बढ़ेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए रायगढ़ जिले के बर्रा कोल ब्लॉक को वर्ष 2028 तक विकसित कर चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। कोयला खदान शुरू होने के बाद कंपनी की बाहरी स्रोतों से कोयला खरीद पर निर्भरता कम होगी। वर्तमान में बालको अपने कैप्टिव पावर प्लांट की जरूरत पूरी करने के बाद करीब 300 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खुले बाजार में बेच रहा है।
राजेश कुमार सिंह ने बताया कि नए स्मेल्टर के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है और करीब 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य को भी निर्धारित समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नए स्मेल्टर के संचालन के बाद उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा, जिससे बालको के साथ-साथ कोरबा के औद्योगिक परिदृश्य में भी बदलाव आएगा।
कोरबा में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी कंपनी एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर विचार कर रही है। वेदांता समूह के रायपुर स्थित कैंसर अस्पताल की तर्ज पर बालको क्षेत्र में भी विशेष कैंसर उपचार सुविधा विकसित करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव का तकनीकी परीक्षण किया जाएगा।
बालको क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए परसाभाठा से रूमगड़ा तक फोरलेन सड़क निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपये जिला प्रशासन को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। बारिश के बाद सड़क निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
कंपनी की विस्तार योजना में स्थानीय स्तर पर रोजगार और औद्योगिक निवेश बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय प्रबंधन को भी महत्व दिया जा रहा है। नए उद्योगों और डाउनस्ट्रीम इकाइयों के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है। बालको प्रबंधन के अनुसार, उत्पादन विस्तार, नए उद्योगों की स्थापना, आधारभूत सुविधाओं के विकास और सामाजिक क्षेत्र में निवेश के जरिए कोरबा को एक मजबूत एल्युमिनियम डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्री हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।